एक दिन हम मजबूर लोग उनसे डरना बंद कर देंगे

एक दिन हम मजबूर लोग उनसे डरना बंद कर देंगे

नितिन सिन्हा (संपादक-खबर सार) 

वो डरते है इसलिए बात_बात पर गाली_गलौज और हिंसा करते है..

उन्हें डर लगता है,शिक्षा और शिक्षित समाज से,,

जो रोजगार और नौकरियों की बातें करता है,,

जो अपना भविष्य अपने परिवार और देश निर्माण के हित में खर्चने की सोचता है,,

जिसे मेहनत की कमाई से रोजी रोटी और सम्मान की जिंदगी अच्छी लगती है,,

जो उनकी तरह धर्म_जात और गाय_गोबर पर खुली फ़ज़ूल की हिंसा नहीं करना चाहता है,,

जिनका मानना है धर्म उसकी पहचान हो सकती है,,परन्तु इंसानियत ही उनका धर्म है,,

वो डरते है ऐसे लोगों से जो शिक्षा और शिक्षित समाज की बात करते है,,

जो समाज में समानता,सम्मान और मौलिक अधिकार की बात करते है,,

जो गांधी और पेरियार की बात करते है,,जिन्हें लगता है कि देश का संविधान सबसे ऊपर है,,

जिन्हें धर्म या जाति विशेष पर नहीं,,बल्कि समाजिक और अम्बेडकरवादी होने पर गर्व है,,

वो उनसे डरते है,,इसलिए बात_बात पर गाली गलौज और हिंसा करते है,,

उन्हें लगता है कि देश का बच्चा अगर पढ़_लिख जाएगा तो उनकी तरह निर्लज्ज और निट्ठल्ला उनके नेताओं के झंडे कौन उठाएगा...

हर चेहरे पर हिंदू_मुसलमान, कौन खोजेगा,,मस्जिद और गिरजाघरों की छत पर कौन अश्लीलता से कौन नाचेगा,,

सत्ता के संरक्षण में माब लीचिंग और हत्याएं कौन करेगा,,

समाज के जरूरतमंदों का हक अधिकार कौन छिनेगा,,राम का नाम लेकर मारपीट कौन करेगा,मंदिरों की संपत्तियां कौन चुराएगा,,

वो डरते है जन_आंदोलन से,

अहिंसक भीड़ से जो एक आवाज में एक साथ खड़ी हो जाती है, और इंकलाब के नारे लगाती है,,

क्योंकि उनकी क्षमता नहीं है कि वो ऐसी भीड़ इक्ट्ठा कर सकें जो सत्ता से सवाल पूछती है,,और एक दूसरे का दुख बांटती है,,

जिन्हें राम_रहीम और ऊंच_नीच जाति में अंतर नजर नहीं आता है,,,

उनका डरना लाजमी है,क्योंकि भारत जैसे लोकतंत्र में उनकी संख्या मुट्ठी भर की है,,और गैरतमंद मेहनतकश लोगों की ज्यादे है।।

और उन्हें पता है कि एक दिन हम मजबूर लोग उनसे डरना बंद कर देंगे..