आउटसोर्सिंग के विरोध में उतरे ट्रेड़ यूनियन

आउटसोर्सिंग के विरोध में उतरे ट्रेड़ यूनियन

अनुराग आचार्य (व्यौरोचीफ)

तालचेर में कई ट्रेड़ यूनियन आउटसोर्सिंग के खिलाफ एक साथ खडे़ हो गए हैं, और ये सभी कंपनी द्वारा आउटसोर्सिंग से ली जा रही कार्य के विरोध में आन्दोलन की चेतावनी दी है।

मिली जानकारी के अनुसार पूरा मामला इस प्रकार है एमसीएल प्रबंधन द्वारा बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग के कारण एमसीएल के विभागीय कर्मचारी और मशीनरी का कम उपयोग किया जा रहा है।  

मजदूर नेताओ का कहना है कि प्रबंधन बिना किसी उचित कारण के विभागीय कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले सभी कार्यों को दिन-प्रतिदिन आउटसोर्स कर रहा है।

विरोध के निननलिखित कारण बताए जा रहे है। 

1. बिना किसी वैध कारण के सभी कार्यों की आउटसोर्सिंग, जिसमें वर्तमान में विभागीय कर्मचारियों द्वारा कुशलतापूर्वक किए जा रहे कार्यों जैसे ओबी, कोयला, सीएचपी का संचालन शामिल है।  विभिन्न खानों में साइलो, रेलवे साइडिंग आदि।

 2. सभी एचईएमएम के काम के घंटों में सुधार।

 3. सभी कर्मचारियों को कॉर्पोरेट उपहार।  

4. एमसीएल कर्मचारी वार्डों के प्रवेश में मेडिकल कॉलेज और कोटा खोलना।

 5. औषधालयों और एनएससीएचएस में डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति के साथ चिकित्सा सेवाओं में सुधार।  

6. वर्तमान आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त स्कूल बस।  

7. डीएवी/केंद्रीय विद्यालयों के एलएमसी में श्रमिक प्रतिनिधि।  परियोजना स्तर पर और रेफरल मामलों के लिए पर्याप्त एम्बुलेंस।  नए क्वार्टरों का निर्माण पूर्व और वर्तमान क्वार्टरों का उचित रखरखाव।  10.कार्य स्थल और कॉलोनियों में शुद्ध पेयजल।  

11. रेफरल अस्पतालों में रेफरल प्रक्रियाओं और कैशलेस सुविधाओं का सरलीकरण।  

12. तकनीकी रूप से योग्य भूमि विस्थापितों की तैनाती और उनकी योग्यता के अनुरूप 9.3.0 के तहत नियोजित। 

13. प्रत्येक ठेका कार्य के लिए अनुमानित मानव शक्ति से अधिक ठेका श्रमिकों की तैनाती।

 14. सभी ठेका श्रमिकों को एचपीसी मजदूरी का भुगतान और उसके सीएमपीएफ और अन्य सामाजिक प्रतिभूतियों की कटौती।  

15. समय कार्यालय में प्रत्येक ठेका श्रमिकों की शारीरिक उपस्थिति।  16. सेवानिवृत्ति की तारीख पर सेवानिवृत्ति बकाया यानी ग्रेच्युटी, सीएमपीएफ, सीएमपीएस, अवकाश वेतन और अन्य का भुगतान जैसा कि पहले किया गया था।