सरपंच चमेली ओझा की गिरफ्तारी पर सियासत गरमाई

सरपंच चमेली ओझा की गिरफ्तारी पर सियासत गरमाई

ओडिशा की सरपंच चमेली ओझा को न्यायिक हिरासत में भेजा गया; केंद्रपाड़ा में राजनीतिक घमासान मचा।
इस बीच, इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। ज़िला सरपंच संघ ने चुने हुए जन-प्रतिनिधि पर हुए कथित हमले की निंदा की और घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
ओडिशा के केंद्रपाड़ा ज़िले के महाकालपाड़ा ब्लॉक की टिकिरी सरपंच चमेली ओझा को कोर्ट से ज़मानत की अर्ज़ी खारिज होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। महाकालपाड़ा ब्लॉक ऑफ़िस परिसर में हुए ज़बरदस्त हंगामे के बाद पिछले दो दिनों से इस घटना की काफ़ी चर्चा हो रही है। अनेक राजनीतिक दल एवं ग्रामवासी सरपंच चमेली ओझा के समर्थन मे खड़े हुए दिखाई पड रहे हैँ, जगह जगह चमेली ओझा के समर्थन मे जन आंदोलन करते हुए देखा जा रहा है तो वही क़ई राजनीतिक दल सरकार औऱ पुलिस को सवाल करना आरम्भ कर दिया है l 

चमेली को पुलिस ने तब हिरासत में लिया जब उस पर ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) के साथ बदसलूकी और दुर्व्यवहार करने, और घटना के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोप लगे। हिरासत में लिए जाने के बाद, उसने पुलिस स्टेशन में खराब तबीयत की शिकायत की, जिसके बाद उसे इलाज के लिए केंद्रपाड़ा ज़िला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया। यहाँ सरपंच चमेली ओझा को अस्पताल मे पर्याप्त बेड ना होने के कारण ज़मीन पर सो कर इलाज कराना पड़ा l 
शनिवार दोपहर को उनकी हालत में सुधार होने के बाद, पुलिस ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ़्तार किया और सब-डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (SDJM) कोर्ट में पेश किया। हालाँकि, कोर्ट ने उनकी ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
इस बीच, इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। ज़िला सरपंच संघ ने चुने हुए जन-प्रतिनिधि पर हुए कथित हमले की निंदा की और घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
दूसरी ओर, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महाकालपाड़ा पुलिस स्टेशन के सामने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने चमेली ओझा के लिए न्याय की मांग की और सरपंच के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

केंद्रपाड़ा ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष देबस्मिता शर्मा ने कहा, "इस सरकार में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। इसके अलावा, वह एक महिला प्रतिनिधि हैं और ब्लॉक परिसर में उनके साथ सही व्यवहार नहीं किया गया। यह दिन-दहाड़े लोकतंत्र की हत्या है। हमें पता चला है कि उन्हें गिरफ़्तार कर कोर्ट में पेश किया गया है। सरकार लोकतंत्र में हिटलर जैसा शासन लागू कर रही है। पुलिस अपराध के खिलाफ कार्रवाई करने में हमेशा देर करती है, लेकिन सरकार को खुश करने के मामले में वे बहुत सक्रिय रहते हैं।"

ओड़िशा मे भाजपा सरकार के दो वर्ष पुरे होने पर जहाँ सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है वही दूसरी ओर सरपंच चमेली ओझा के मामला मे सरकार घिरती नजर आ रही है l अब देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मामले को किस प्रकार सुलझाती है l