सरंडा़ जंगल में तैनात अर्धसैनिक बल के जवानों पर बज्रपात एक की मौत

सरंडा़ जंगल में तैनात अर्धसैनिक बल के जवानों पर बज्रपात एक की मौत

झारखंड के पश्चिम सिंहभुम जिले में स्थित सारंडा़ जंगल में तैनात अर्धसैनिक बल के कई जवान 16 अप्रैल की शाम आसमानी बिजली की चपेट में आ गए, जिससे एक की मौत हो गई और अन्य कई जवान गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे है। 

सूत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार  पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में तैनात सीआरपीएफ के द्वितीय कमान अधिकारी एमपी सिंह की मौत आसमानी बिजली की चपेट में आने से हो गई । यह घटना बीते शुक्रवार दिनांक 17 अप्रैल की शाम 5:30 बजे उस वक्त हुई जब बालिबा स्थित सीआरपीएफ की 26वीं बटालियन के शिविर पर आसमानी बीजली गिरी। आसमानी बीजली की चपेट में आकर कुल चार जवान गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से एमपी सिंह की मौत चिकित्साधीन अवस्था में हो गई। प्राप्त सूचना के अनुसार अन्य घायलों में सहायक कमांडेंट सुबीर कुमार मंडल, झारखंड जगुआर के  सहायक उप निरीक्षक सुरेश भगत और सहायक उप निरीक्षक चंदलाल हांसदा शामिल हैं। सभी को प्राथमिक उपचार के बाद टाटा मेन हॉस्पिटल, नोवामुंडी में भर्ती कराया गया, जहां तीनों की हालत नाजुक बनी हुई है।नक्सल प्रभावित इस इलाके में तैनात सुरक्षाबल एक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी ड्युटी कर रहे हैं। ऐसे में इस तरह की प्राकृतिक आपदा एक नई मुश्किल बनकर सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वज्रपात की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के ग्रामीण दहल उठे थे। घटना की जानकारी मिलते ही किरीबुरु-मेघाहातुबुरु जनरल अस्पताल से मेडिकल टीम ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य आवश्यक सामग्री के साथ घटना स्थल के लिए रवाना हो गए और कठिन परिस्थितियों में घायलों को जंगल से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया । प्रशासन और मैडिकल टीम की तत्परता ने घायलों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर और कोल्हान पुलिस उप महानिदेशक मनोज रतन चौवे ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि घायलों को बेहतर इलाज के लिए उन्हें हेलीकॉप्टर से रांची भेजा गया है। डीआईजी ने बताया कि एक दिन पहले ही नक्सल अभियान की रणनीति तय की गई थी, लेकिन उससे पहले ही यह दुखद हादसा हो गया।सीआरपीएफ के द्वितीय कमान अधिकारी एमपी सिंह मणिपुर के निवासी थे। उनका पोस्टमार्टम जमशेदपुर में किया जाएगा इसके बाद सम्मानपूर्वक अंतिम श्रद्धांजलि दी जाएगी, और उनका पार्थिव शरीर हेलीकॉप्टर के माध्यम से कोलकाता होते हुए मणिपुर स्थित उनके पैतृक गांव भेजा जाएगा, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत क्षति है, बल्कि सुरक्षाबलों के लिए एक बार फिर यह याद दिलाती है कि नक्सल विरोधी अभियान के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं से भी मुकाबला करना उनकी ड्यूटी का अहम हिस्सा है।