वो लड़की है जो डरती नहीं है
तुम्हारी लाठियों से बंदूक से,गोले से,तुम्हारी पुलिस से तुम्हारे बर्बर हिंसक और ग़ालिबाज समर्थकों से,,वो नहीं डरती है तुम्हारे अनपढ़,सत्ता लोलुप,अपराधी,षड्यंत्रकारी, बलात्कारी और भ्रष्ट नेताओं से,, उसने भले ही जन्म लिया हो,किसी किसान,मजदूर,सैनिक या साधारण से कर्मचारी के छोटे से घर में,,
पर उसे तुम्हारे महलों की नींव हिला देनें वाले इंकलाब के नारे लगाना आता है,,,पुलिस की लाठियां और गोलियां खाना आता है,वो संगीनों के सामने अपना सीना अड़ा लेती है और बस के आगे खड़े होकर कहती है,है हिम्मत तो चढ़ा दो गाड़ी मुझ पर,,उसे जरा भी डर नहीं लगता है घर बाहर,किसी गली_नुक्कड़ या सड़क पर तुम्हारी सड़ी_ गली व्यवस्था खिलाफ सवाल उठाने से,,
वो भले ही घर में सबकी प्यारी है पर,,वो अपने पापा की बहादुर बेटी भी है,,उसे चिंता है उसके अपने और अपने जैसे और भाई _बहनों के भविष्य की,,
इसलिए उसने चुना है,कि उसका रास्ता क्रांति का होगा,उसे लड़ना होगा,गांधी और अंबेडकर की तरह से,,सरकार और उसके पोषित गुण्डों से,,जिसमें कुछ गुंडे वर्दी में होंगे और उस बनावटी भी होंगे,,उसे पता है कि उसके फैसले के खिलाफ तुम कायर और घृणित मानसिकता वाले लोग प्रतिकार करोगे,,उसे शारीरिक चोट दोगे,, उसका चरित्र हरण भी करोगे,,
फिर भी डटे रहेगी,, क्योंकि उसने तय किया है मुसीबत लड़ना है और एक बहादुर लड़की बनना है,,
उसे दर्द है, पिछले 14 सालों में सवा लाख छात्रों की मौत का,,और उसकी तरह 21 उन बच्चों का जिन्होंने डाक्टर बनने का सपना देखा था,,सालों आधे पेट खाकर कड़ी मेहनत की थी,,वो जो टूट गए,,तुम्हारे बनाए सिस्टम से और तुम्हारी बेशर्मी से,, उसे पता है उन्हें न्याय दिलाने तक तुमसे लड़ना होगा,,उसके साथ खड़े लोगों को तुमसे बचाना होगा,,यही नहीं आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित होगा,,ताकि देश के किसी मां_बाप को कर्ज लेकर अपने बच्चों को न पढ़ाना पढ़े,,और कोई बच्चा परीक्षा में असफलता के कारण आत्महत्या नहीं करे,,शिक्षा की महंगी दुकानों और कोचिंग माफियाओं को खत्म किया जा सके,,, इसलिए वो डटी के तुम्हारी हिंसा के आगे,तुम्हारे अत्याचार के खिलाफ,तुम्हारे दमन के विरुद्ध,
तुम्हारे दुष्प्रचार के विरोध में,, तुम्हारी सेना और पुलिस तंत्र के ठीक सामने,,, पता है क्यूँ...क्योंकि वो लड़की है,,जो डरती नहीं है,,
कृति
नितिन सिन्हा संपादक दैनिक खबर सार रायगढ़ छ.ग.





