विशेष मतदाता पुनरीक्षण के बाद 20 लाख नाम हटे

विशेष मतदाता पुनरीक्षण के बाद 20 लाख नाम हटे

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

ओडिशा में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण के पहले चरण के पूरा होने के बाद राज्य की मसौदा मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इस प्रक्रिया में 20 लाख 14 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इनमें अधिकांश नाम मृत्यु, दूसरे स्थान पर पलायन अथवा सत्यापन के दौरान अनुपस्थित पाए जाने के कारण हटाए गए हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) आर. एस. गोपालन ने बताया कि 30 मई से 28 जून तक चले घर-घर सर्वेक्षण के बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या 3,33,99,591 से घटकर 3,13,87,034 रह गई है। नई मसौदा सूची में 1,60,19,176 पुरुष, 1,53,65,083 महिला तथा 2,775 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं। पुनरीक्षण के दौरान लगभग 3.13 करोड़ मतदाताओं से गणना प्रपत्र प्राप्त हुए, जो कुल मतदाताओं का 93.97 प्रतिशत है।

सर्वेक्षण में 8.32 लाख (2.49%) मतदाता मृत, 10.07 लाख (3.02%) मतदाता स्थानांतरित या अनुपस्थित, तथा 1.58 लाख (0.47%) मतदाता एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए। इसके अलावा 14,000 मतदाताओं ने 28 जून की निर्धारित समय सीमा तक गणना प्रपत्र जमा नहीं किया, जिसके कारण उनके नाम भी मसौदा सूची में शामिल नहीं किए गए।

गोपालन ने स्पष्ट किया कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम मसौदा सूची में नहीं हैं, वे 5 जुलाई से 4 अगस्त तक चलने वाली दावा एवं आपत्ति अवधि में फॉर्म-6 भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन स्थानीय बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) या ऑनलाइन माध्यम से भी किया जा सकता है।उन्होंने बताया कि दावे एवं आपत्तियों की सुनवाई 2 सितंबर तक चलेगी और अंतिम मतदाता सूची 6 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी।

मतदाता अपना नाम स्थानीय बीएलओ, ECINET मोबाइल ऐप, मतदाता पोर्टल अथवा ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर देख सकते हैं।सीईओ ने कहा कि मसौदा सूची से किसी भी मतदाता का नाम बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए नहीं हटाया जाएगा। नाम हटाने से पहले संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी द्वारा नोटिस जारी किया जाएगा तथा कारण सहित आदेश पारित किया जाएगा। यदि कोई मतदाता असंतुष्ट है, तो वह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24 के तहत पहले जिला कलेक्टर और उसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का उद्देश्य पारदर्शी, सहभागी और समावेशी मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया सुनिश्चित करना है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न रहे।