भारत के 9 साल का सूखा खत्म
सतीश शर्मा (वरिष्ठ खेल पत्रकार)
चेन्नई में 10 दिसंबर को संपन्न हुए 14वें एफआईएच जूनियर पुरुष हॉकी विश्व कप में भारतीय युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीतकर न केवल नौ वर्ष का सूखा समाप्त किया बल्कि भारतीय हॉकी के भविष्य के प्रति भी आश्वस्त किया है।
दल के टीम के हेड कोच पी.आर. श्रीजेश, इस विजय से बहुत खुश हैं, उन्होंने अर्जेंटीना के खिलाफ अपनी टीम की ज़बरदस्त वापसी वाली जीत की बहुत तारीफ़ की है।
मेयर राधाकृष्णन हॉकी स्टेडियम में कांस्य पदक के मैच में भारत एक मुश्किल मुकाबले 2021 के विजेता अर्जेंटीना के विरुद्ध खड़ा था। इस मैच में भारत ने दो गोल से पिछड़ने के बाद रोमांचक वापसी करते हुए अर्जेंटीना को 4-2 से हराया। इस जीत के साथ भारत ने जूनियर पुरूष हॉकी वर्ल्ड कप में मेडल जीतने का सूखा समाप्त किया। भारत ने अपना आखिरी खिताब नौ साल पहले 2016 में लखनऊ में जीता था।
यह पहली बार है कि भारत ने कांस्य पदक जीता है। इससे पहले भारत ने दो स्वर्ण पदक (2001-ऑस्ट्रेलिया और, 2016 लखनऊ ) और एक रजत पदक (1997 इंग्लैंड) जीत चुका है। 2021 में भुवनेश्वर तथा 2023 में कुआलालंपुर में भारत को चौथे स्थान से संतुष्ट रहना पड़ा था।
जर्मनी के खिलाफ सेमीफाइनल में 1-5 की करारी हार के बाद भारत
अर्जेंटीना से कांस्य पदक के लिए भिड़ंत हुई थी। इस मैच में
तीसरे क्वार्टर के अंत तक 0-2 से पीछे चल रही भारतीय टीम ने आखिरी क्वार्टर में जबरदस्त हमला बोला और सिर्फ 12 मिनट में चार गोल दागकर रोमांचक जीत दर्ज की। अंकित पाल और मनमीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर से लगातार दो गोल दागकर स्कोर 2-2 किया। इसके बाद शारदा नंद तिवारी ने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में बदलकर भारत को पहली बार बढ़त दिलाई। अंत में अनमोल एक्का (मैच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी) ने दमदार ड्रैग-फ्लिक के जरिए चौथा गोल दागकर भारत की जीत सुनिश्चित कर दी।
भारत का प्रदर्शन देख ऐसा लग रहा था कि वह यह मैच भी गंवा देगी। आखिरी क्वार्टर में भारत वो कर दिखाया जिसकी किसी ने कोई उम्मीद नहीं की थी।
घरेलू विश्व कप भारतीय टीम के लिए खास यादगार नहीं रहे है। ग्रुप चरण में कमजोर टीमों पर एकतरफा जीत के बाद नॉकआउट में भारत की कमजोरियां सामने आईं। दोनों मैचों में टीम की रक्षा कमजोर दिखी और दबाव में खिलाड़ी लड़खड़ा गए। क्वार्टरफाइनल में प्रिंस दीप सिंह की शूटआउट वीरता को छोड़ दें तो बाकी टीम का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।
भारत ने पहले मैच में चिली को 7–0 से और दूसरे मैच में ओमान को ऐतिहासिक 17–0 से पराजित किया। इसके बाद स्विटज़रलैंड को 5–0 से हराकर भारत ने पूल चरण में प्रभावी दबदबा दिखाया। तेज आक्रामक खेल और अनुशासित रक्षा ने टीम को शुरुआती दौर से ही मजबूत दावेदार बना दिया।क्वार्टरफाइनल में भारत का सामना बेल्जियम से हुआ। रोमांचक मुकाबला 2–2 से समाप्त हुआ, लेकिन शूटआउट में भारत ने 4–3 से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। इस जीत में गोलकीपर प्रिंसदीप सिंह के महत्वपूर्ण बचाव निर्णायक रहे। जर्मनी के विरुद्ध सेमी फाइनल में भारतीय दल पूरी तरह बिखर गया। वे मनमाने तरीके से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे। अंततः वे 5-1 से मैच जीत गये।
चैम्पियनशिप के तीन महत्वपूर्ण मैचों में विपक्षी टीमों ने बार-बार भारतीय रक्षा को बीच से भेद दिया। मिडफील्ड और रक्षा के बीच तालमेल की कमी दिखी, जिससे प्रतिद्वंदी सहज भाव से ही गोल क्षेत्र तक पँहुच रहे थे।
टीम के तेज आक्रमण, फिटनेस और मिडफील्ड के संतुलन ने उम्मीद जगाई है। खिलाड़ियों ने कड़ी मेहनत, जुझारूपन और जुनून भाव भी दिखाया है। पर इसमें निरन्तरता की जरुरत है। गोलकीपर प्रिंस दीप सिंह, अनमोल एक्का, आद्रोहित एक्का, मनमीत सिंह, अर्शदीप सिंह, जैसे युवा खिलाड़ी भविष्य की सीनियर टीम के लिए महत्वपूर्ण संपत्ति साबित हो सकते हैं।
दो बार के ओलंपिक पदक विजेता श्रीजेश के नेतृत्व में दल का प्रदर्शन अच्छा रहा है। उन्होंने खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त की।
“जूनियर्स के लिए यह एक शानदार यात्रा है,” उन्होंने कहा। “मैंने इन खिलाड़ियों से कहा कि अगर आप इस दबाव में टिक सकते हैं, तो यही आधार है, क्योंकि भविष्य में आपको ओलंपिक या अन्य बड़े टूर्नामेंट्स में इसका सामना करना पड़ेगा।”
कुल मिलाकर, भारत ने इस विश्व कप में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और देश को नई उम्मीदें दी। अनुभवी टीमों के सामने हार ने सुधार की जरूरत भी दिखा दी, लेकिन इस पीढ़ी के खिलाड़ियों के पास अंतररा ष्ट्रीय स्तर पर भारत को नई पहचान दिलाने की क्षमता स्पष्ट दिखती है। जूनियर पुरूष दल ने काफी मेहनत करने को तो रेखांकित किया है। पर उम्मीद बरकरार है कि पुरूष हॉकी सही दिशा में च रही है।
दूसरी तरफ चिली में आयोजित 11वीं जूनियर महिला हॉकी विश्व कप में भारत ने एक बार फिर निराश किया।
भारत ने शुरुआत धमाकेदार तरीके से की — पहले मैच में नामीबिया को 13-0 से हराया।
पूल के दूसरे मैच में जर्मनी के हाथों 1-3 से पराजय मिली। इस हार ने ही भारत को क्वार्टर फाइनल में स्थान बनाने में वंचित कर दिया ।
अपने पूल में आखिरी मैच में भारत ने आयरलैंड को 4-0 से हराया।
जूनियर महिला विश्व कप हॉकी चैम्पियनशिप में भारत केवल एक बार (2013 में ) ही अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता है। सीनियर दल की ओलिंपिक खेलों के लिए सीधे प्रवेश मिलने में विफलता ने दल का मनोबल तोड़ा है। अब जूनियर दल के प्रदर्शन से स्पष्ट हो गया है कि महिला हॉकी के क्षेत्र में भारत को बहुत मेहनत करनी होगी। हाल ही में महिला दल के कोच हरेन्द्र सिंह के अचानक इस्तीफे से भी दिखा है कि महिला दल के प्रबंधन में कुछ गड़बड़ झाला है।
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