बिसरा प्रखंड अंतर्गत सरकारी आवास योजना में व्यापक भ्रष्टाचार के आसार
ओडिशा के सूंदरगढ जिले में स्थित बिसरा प्रखंड अंतर्गत आनेवाले जरइकेला पंचायत क्षेत्र में सरकारी आवास योजना के तहत बने आवास में संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से योग्य उम्मीदवारो को दरकिनार कर अयोग्य उम्मीदवारों को योजना का लाभ दिए जाने की खबरें सूत्रों के हवाले से मिल रही थी।इस पर बिसरा प्रखंड़ कार्यालय से आरटीआई के माध्यम से जरईकेला पंचायत क्षेत्र में बने सरकारी आवासो के संदर्भ में जानकारी मांगी गई थी,पर साल भर से ज्यादा समय बीत जाने पर भी जानकारी प्रदान नहीं की गई। विभिन्न सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार इस पंचायत क्षेत्र में कई सरकारी आवासों के लिए पहली किस्त लाभार्थीयो के खाते तक पहुंची, जिसके बाद ना तो किस्ते मिली और ना ही आवास बनी। कुछ ऐसे अयोग्य उम्मीदवारों को भी सरकारी आवास योजना के तहत आवास दिए गए है, जिनके पास अच्छे पक्के मकान है तो कुछ लोगों को कई बार योजना का लाभ दिया गया है।
आरटीआई में पूछे गए प्रश्न के कुछ प्रमुख अंश
1.सन् 2015 की जनवरी माह से अबतक सरकारी आवास योजना के तहत कितने लोगों को आवास आवंटित की गई है।
2.किस आधार पर आवास योजना का लाभ दिया गया।
3.आवंटित आवास की वर्तमान स्थिति।
4.किस प्लांट पर आवास निर्माण किया गया है,उसका विवरण।
5.लाभार्थियो को दी गई धन राशि का विवरण।
मांगी गई सूचना लोक सूचना अधिकारी,बिसरा पंचायत समिति कार्यालय द्वारा जब प्रदान नहीं की गई तो याचिका कर्ता अपील में गया। अपील की सुनवाई बिसरा प्रखंड़ विकास अधिकारी जगन्नाथ हनुमान के द्वारा दिनांक 06.07.2024 को समय 11.00 बजे की गई थी, और यह आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही इसका उत्तर दे दिया जायगा परंतु आजतक उत्तर नहीं मिला। यह घटना इस बात की ओर इशारा कर रही हे, कि बिसरा पंचायत समिति कार्यालय द्वारा सच को छुपाया जा रहा है और विभिन्न सूत्रों के हवाले से इस संदर्भ में जो जानकारी मिल यही है, उसमें सच्चाई होने की संभावना अधिक है।

ठीक इसी तरह बिसरा प्रखंड के बिसरा पंचायत क्षेत्र में भी रेलवे की जमीन पर सरकारी आवास का निर्माण हुआ पाया गया, ठीक इसी जगह एक और सरकारी आवास का निर्माण किया जा रहा था ओर उसकी पहली किस्त भी जारी हो चुकी थी,जो विवादो के कारण हो नहीं पाया। सरकारी आवास योजना के तहत रेलवे की जमीन पर बनी आवास में लम्बे समय तक कोई रहने नही आया,स्थानीय लोगों में ऐसी चर्चा सूनने को मिल रही थी कि इनका मकान कहीं और भी है जहाँ वे रहते है। दूसरा मकान जो बन नहीं पाया वह एक ऐसे व्यक्ति को मिला था जो बिसरा सरकारी अस्पताल का कर्मचारी है और स्थानीय लोगों के अनुसार उसने अपने घर किराए पर दे रखा है।इतना ही उसके पास रहने के लिए पर्याप्त मकान भी है। घर किरये पर देना उनके आमदनी का एक जरिया है।
यह पूरी घटना इस बात की ओर इशारा कर रही हैं, कि बिसरा प्रखंड अंतर्गत आनेवाले सरकारी आवास योजना में भ्रष्टाचार जमकर हुई है। लोगों की मांग है कि इसकी उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है।





