नेताजी जयंती बिशेष
महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी की 127 वीं जयंती पर विशेष......
नितिन सिन्हा (संपादक - खबरसार)
आजाद हिंद फौज के संस्थापक एवं महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें शत्-शत नमन और *आप सभी पराक्रम दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।*
भारत में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले देशभक्तों की कमी नही रही है। परन्तु यह भी उतना ही बड़ा सच है कि नेताजी जैसा दृढ़ संकल्पी,अतुलनीय साहस,उत्कृष्ठ नेतृत्व,त्याग,बलिदान और महान समर्पण भाव का राष्ट्रवादी कोई दूसरा नही हुआ।। यही वजह है कि हम और हमारी आने वाली कई पीढियां जीवन पर्यंत नेताजी के त्याग और बलिदान के प्रति कृतज्ञ रहेंगी।।
स्वतंत्रता संग्राम के लिए महात्मा गांधी से प्रेरित होकर नेताजी ने कुछ अलग करने की ठान ली थी। हालांकि उनके इस निर्णय के बाद बापू और नेताजी के मध्य वैचारिक भिन्नता आ गई थी। परन्तु बापू को सर्वप्रथम राष्ट्रपिता से सम्बोधन करने वाले नेताजी ने कोहिमा की लड़ाई में बापू से ही जीत का आशीर्वाद लिया था।
*फिर उन्होंने सिंगापुर में दिल्ली चलो का नारा दिया था। कई बार जंग में उन्होंने अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी और उन्हें हराया भी था।*
अब तक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी ने न केवल अपने देश में वरन पूरी दुनिया में अपनी पहचान एक निडर देशभक्त फौजी और बेहतरीन नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित कर ली थी। *नेताजी का जन्म 23 जनवरी 1897 मतलब आज ही के दिन उड़ीसा के कटक शहर में हुआ था।* हालांकि उनकी मौत पर से पर्दा आज तक नहीं उठ सका। उनके निधन को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आती रही हैं। नेताजी भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में शामिल होने वाले अग्रणी नेताओं में से एक और सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति रहे हैं। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने और भारत को आजादी दिलाने के मकसद से आजाद हिंद फौज का गठन किया था। उस वक्त उन्होंने नारा दिया था *तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।* जिसका सीधा सा अर्थ यह था कि देश की आजादी की लड़ाई में उस वक्त अपना सर्वश्व न्यौछावर करने वाले लोग उन्हें चाहिएं थे।। तभी विशाल अंग्रेजी साम्राज्य से लड़कर आजादी ली जा सकती थी । उनके इस एक नारे के बाद देश- विदेश में रह रहे हजारों भारतीय उनसे आ जुड़े थे।





