इस्पात साहित्य संसद का स्थापना दिवस मनाया गया
अग्रणी साहित्य संस्था 'इस्पात साहित्य संसद' का 56वां स्थापना दिवस सेक्टर-7 स्थित अपने कार्यालय परिसर में अध्यक्ष नृसिंह चरण बिश्वाल की अध्यक्षता में भव्य समारोह के साथ आयोजित किया गया। इस सभा का उद्घाटन पूर्व अध्यक्ष एवं कवि हर मोहन मिश्र ने किया, जबकि एक अन्य पूर्व अध्यक्ष व साहित्यकार त्रिलोचन मथान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
सबसे पहले अतिथियों द्वारा प्रभु श्री जगन्नाथ की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया। दीप प्रज्वलन के समय सदस्य ज्योतिर्मय आचार्य ने वेद मंत्रों का उच्चारण किया। महासचिव मनोज कुमार नंद के मंच संचालन में आयोजित इस सभा में 'इस्पात साहित्य संसद का अतीत, वर्तमान और भविष्य' विषय पर एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यकारी अध्यक्ष प्रताप कुमार पंडा, संयुक्त महासचिव सुशांत कुमार नायक सहित श्री रघुबर धल, प्रशांत कुमार पति, विजयिनी जेना, रश्मित कुमार साहनी और सत्यव्रत दास आदि ने आलोच्य विषय पर प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वर्गीय विद्याधर बारिक के साथ तीन-चार आयोजकों ने मिलकर 3 दिसंबर 1971 को जिस संसद (संस्था) की शुरुआत की थी, वह अब एक महावृक्ष में बदल गई है। इस अवसर पर अध्यक्ष श्री बिश्वाल ने संस्थापक सदस्य रघुबर धल को अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया।
दिवंगत सदस्यों का स्मरण किया गया और साहित्य संसद के लिए उनके योगदान पर चर्चा की गई। जिन जन-प्रतिनिधियों तथा सदस्यों के आर्थिक और संगठनात्मक योगदान के बल पर इस्पात साहित्य संसद वर्तमान स्तर पर पहुंच सकी है, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। अंत में प्रताप कुमार पंडा ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कवि और लेखकों ने भाग लिया।





