आटो रिक्शा में भेड़ बकरियाँ की तरह ठूंसे जा रहे है बच्चे
अनुराग आचार्य (व्योरोचीफ)
ओडिशा में अंगुल जिला अंतर्गत आनेवाले औद्योगिक शहर तालचेर में सड़क दुर्घटना की खबरें अक्सर प्रकाश में आती रहती है। मुख्य रूप से तालचेर में अनेको कोयला खादान और विद्युत उत्पादन केंद्र है। यहाँ अनेको छोटे बडे़ उद्योग भी है,जिसके कारण शहर में भारी वाहनों का आवागमन लगा रहता है। इन भारी वाहनों के चपेट में आकर कई लोग अपनी जान गवां चुके है, तो कई गंभीर रूप से घायल हो गए है। कई बार मोटरसाइकिल जैसे छोटे वाहनों को पीछे से टक्कर मारी गई फलस्वरूप चोटिल व्यक्ति घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिया या गंभीर रूप से घायल हो गया।
ऐसे में सवारियों से खचाखच भरा एक आटो रिक्शा क्रमांक ओडी 35-5406,को तालचेर के व्यस्त सड़क मार्ग लिंगराज सड़क पर यातायात नियमों का उल्लंघन करते हुए बेख़ौफ होकर सरफट दौडता देखा गया। इस आटो रिक्शा के पीछे की तरफ समान (लगेज) रखे जाने वाले स्थान पर कुछ बच्चों को भेड़ बकरियाँ की तरह ठूंस कर बैठाया गया था। ये बच्चे हाथ पैर झूलाते हुए मस्ती कर रहे थे। प्रश्न उठता है क्या इसके लिए केवल आटोचालक ही जिम्मेदार है, क्या इन बच्चों के अभिभावको को इसके लिए जिम्मेदार नही ठहराया जाना चाहिए जो किराए के चंद रुपये बचाने के लिए अपने बच्चों को भेड़ बकरी की तरह आटो रिक्शा के डिक्की में डालकर स्वंय सवारी सीट में बैठकर सफर कर रहे थे।
क्या यातायात विभाग को या मौके पर तैनात यातायात पुलिसकर्मी इसके लिए जिम्मेदार नही है। जब यातायात विभाग द्वारा आटो रिक्शा के लिए 3+1 (तीन सवारी पीछे की सीट पर और एक आगे की सीट पर चालक के साथ) सवारी का प्रावधान है। तो चार से ज्यादा सवारियों को लेकर जा रही आटो रिक्शा पर कार्यवाही क्यों नही की गई।
यह दृश्य देखकर ऐसा लगता है कि तालचेर में यातायात विभाग या तो सो रहा है या किसी स्वार्थ बस इनपर कार्यवाही करने से बच रहा है।





