आइए छद्म राष्ट्रवादी आपातकाल का स्वागत करें
नितिन सिन्हा (संपादक-खबरसार)
हम उस दौर में आ चुके है जहां देश या राज्य की सत्ताधारी पार्टी के प्रमुखों को आलोचना सुनने की आदत नही है,, उन्हे पत्रकार नही बल्कि भांड ( किराए का चरित्र) का चरित्र चाहिए..
खबर है कि दिल्ली पुलिस ने आज सुबह संजय राजौरा, भाषा सिंह,उर्मिलेश, प्रबीर पुरकायस्थ, अभिसार शर्मा, औनिंद्यो चक्रवर्ती और सोहेल हाशमी के घरों पर छापेमारी की है और उनके फ़ोन और लैपटॉप ले गए हैं. कई पत्रकारों को पुलिस स्टेशन ले जाया गया है. ये सभी न्यूज़क्लिक से जुड़े हुए हैं.
*आरोप है आतंकी संगठन से इलीगल फंडिंग का।।।*
जिस तरह किसी भी राज्य की पुलिस के लिए उस राज्य के आम आदमी को नक्सली बता कर अरेस्ट करना,या एनकाउंटर करना बहुत सामान्य सी बात है, ठीक उसी तरह केद्रीय और राज्य सत्ता के द्वारा किसी को भी आतंकी बताकर गिरफ्तार करवाना बेहद मामूली सी घटना है।।
घटना अगर सही है तो चिंतनीय है,, वाकई हम दूसरे छद्म राष्ट्रवादी आपात काल में प्रवेश कर चुके हैं।। यहां लोकतांत्रिक अधिकार अभिव्यक्ति की आजादी कोई मायने नहीं रखती।। सच कहूं तो आज के इस दौर में अपनी भूमिका निभाने के लिए निष्पक्ष पत्रकारों और जिम्मेदार नागरिकों को सामने आने का समय आ चुका है।।
इससे पहले भी आपने राष्ट्रवादी सत्ता के घोषित कथित राष्ट्रद्रोहियों का नाम पढ़ा होगा,,,,मसलन बीएसएफ जवान तेज बहादुर,सीआरपीएफ के पंकज मिश्रा,कोबरा के सुजॉय मंडल,समाज सेवक हिमांशु कुमार,न्यायविद सुधा भारद्वाज,पत्रकार कमल शुक्ला,जनसंदेश टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह और धनंजय सिंह सहित कई अन्य नामों की लिस्ट इतनी लंबी है कि सब का जिक्र संभव नहीं है।। मजे की बात यह है कि जिनको भी सरकार या पुलिस तंत्र ने राष्ट्रद्रोही या आतंकी बताया है उनमें से अधिकांश को माननीय न्यायालय ने क्लीन चिट दी है।। बाकी अभिव्यक्ति को दबाने का सबसे आसान रास्ता पुलिस और झूठे सरकारी आरोप हैं।।





