अलचिकी शताब्दी सम्मेलन संपन्न

अलचिकी शताब्दी सम्मेलन संपन्न

अलचिकी की राउरकेला ब्रांच, नाहा तिरला गांवटा और ASEC जुवान गांवटा ने दो दिनों तक राउरकेला के सिविक सेंटर में अलचिकी, जो कि संताली लिपि है, जिसे पंडित रघुनाथ मुर्मू ने 1925 में बनाया था, के बनने की शताब्दी वर्ष मनाई। आज सुबह 10 बजे सेक्टर 6 टेलीफोन भवन से सिविक सेंटर तक पारंपरिक नाच-गाने के साथ एक कल्चरल जुलूस निकाला गया और उसके बाद, अलचिकी बनने की शताब्दी सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि और ASEC के संस्थापक सदस्य श्री शोभनाथ बेशरा ने किया।

समारोह में, गेस्ट स्पीकर्स ने अलचिकी के प्रचार, प्रसार और समस्याओं से जुड़े अलग-अलग विषयों पर अपने भाषण दिए। डॉ. नाकू हांसदा ने अलचिकी लिपि पर डिटेल में चर्चा की। देवीप्रसन्न बेशरा ने आदिवासियों के होने और न होने पर चर्चा की। श्रीमती बसंती मुर्मू ने समाज के नियम, रीति-रिवाज, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने पर बल दिया। श्रीमती शोभा हांसदा कर्ण मुर्मू फूलमनी हेम्ब्रम ने आदिवासी समाज में महिलाओं की शिक्षा और संस्कृति पर चर्चा की। अमेरिका के जर्सी से आईं वक्ता श्रीमती मायन मुर्मू ने विदेशों में अलचिकी में पढ़ने पर विस्तृत चर्चा की। डॉ. दुली हेम्ब्रम ने अपने भाषण में सवाल उठाया कि अलचिकी के माध्यम से शिक्षित होने के बाद महिलाओं का क्या स्थान है। अंतिम सत्र में श्रीमती सलीमा मरंडी द्वारा संताली कविता का पाठ किया गया। अलचिकी के व्यापक उपयोग और सम्मान और इसकी आवश्यकता के कारण, केंद्र सरकार ने दिसंबर 2003 में 22 तारीख को संताली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किया इस अवसर पर संस्था की ओर से अलचिकी एवं संताली सा

हित्य के प्रचार, प्रसार में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को सम्मानित किया गया। श्री रुइहा मरंडी, बैहा बिश्वनाथ टुडू, सिद्धिलाल मुर्मू, शिरिप चंद्र सारेन, कृपी सिंधु वलया, जयराम टुडू, सालखु मुर्मू, झान मुर्मू, लक्ष्मी हांसदा, श्रीमती कमलाक्षी मरंडी एवं रमेश चंद्र पात्र को सम्मानित किया गया। आज बाघराय चरण हेम्ब्रम को गुरुगामके सम्मान, तसीलदार हांसदा को सम परगना सम्मान एवं हरि मोहन हेम्ब्रम को कील पंचा से सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही सोमनाथ हांसदा, रामराय माझी, लखाय बास्के, भीमवार मुर्मू एवं डॉ. देबराज हांसदा को भी सम्मानित किया गया। सम्मेलन में अलचिकी के माध्यम से शिक्षा के प्रचार, विकास, प्रगति एवं भविष्य पर चर्चा की गई। सम्मेलन में ओडिशा एवं अन्य राज्यों से हजारों की संख्या में भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रेमी शामिल हुए। ASEC सदस्य श्री रमेश चंद्र पात्रा ने कहा कि डांसर्स और म्यूज़िशियंस के कल्चरल प्रोग्राम से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।