स्वतंत्रता सेनानीयो को समर्पित प्रजामंड़ल बना भूत बंगला
अनुराग आचार्य (व्यौरोचीफ)
तालचेर के हट्टोतोटा स्थित उपजिलापाल कार्यालय के सामने बना स्वतंत्रता सेनानीयो को समर्पित "प्रजामंडल भवन" आज भुतहा घर में तब्दील हो गया है। इस प्रजामंडल भवन का निर्माण वर्ष 1998 में 1 करोड़ रुपये की लागत से एमसीएल द्वारा किया गया था। इस भवन का निर्माण देश के लिए अपने प्राणो की आहुति देने वाले अमर बलिदानीयो की यादों को संजोने के लिए किया गया था।
इस भवन के निर्माण के लिए तालचेर क्षेत्र के प्रसिद्ध शनिवार साप्ताहिक बाजार को अंगरुआ मैदान में स्थानांतरित किया गया था।
इसका मुख्य उद्देश्य तालचेर क्षेत्र में स्वतन्त्रता आन्दोलन में देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों के छायाचित्रों,उनके द्वारा उपयोग में लाई गई बस्तुओं, पुस्तकों, व अन्य यादो को एकत्रित कर भवन में स्थापित करना था। इस तरह स्वतंत्रता सेनानीयों को श्रद्धांजलि देने के साथ, आने वाली पीढ़ी में अमर शहीदों की वीरता, देशप्रेम, की यादगारो के माध्यम से उनमें देश प्रेम की भावना जगाने का एक माध्यम था। लेकिन स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अक्षमता के कारण यह भवन अब जीर्ण-शीर्ण होकर भूतहा घर में तब्दील हो चुका है।
गौरवमय तलचेर में इस भवन की क्या शान,और पहचान है, इस बात से अंदाजा लगा सकते है कि यह प्रजामंडल स्थान पहले एक शिकारगाह बन गया था, इस स्थान पर कई देशभक्तों ने अपनी प्राणों की आहुति दी थी, इसलिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर प्रजामंडल भवन का निर्माण किया गया था। इतना ही नहीं, उस समय जीवित बचे स्वतंत्रता सेनानियों को 15 अगस्त के दिन स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्वर्गीय गांधी के आदेश पर जिलापाल की देखरेख में दिल्ली के लालकिला तक एक ट्रेन द्वारा ले जाया गया, और स्वर्गीय गांधी ने उनकी वीरता के लिए उन्हें तांब्रपत्र से सम्मानित किया था।
लालकिला में देशभक्ति स्मारक में इन महान स्वतंत्रता सेनानियों के नामों का उल्लेख है।
हालांकि, तालचेर में एक भव्य उद्देश्य के लिए बनाया गया प्रजामंडल भवन अब जीर्ण-शीर्ण हो गया है और पशु पक्षियों का अड्डा बन गया है,यह भवन उनके मल,मूत्र से भर गया है।
हालांकि भवन बनने के बाद से ही इसकी जिम्मेदारी नगर परिषद के हाथों में है और हर साल वह इस जगह से विभिन्न शादियों, बाजारों, मेलों आदि के माध्यम से लाखों रुपये की कमाई करता है, लेकिन रखरखाव की कमी के कारण भवन जर्जर अवस्था में पहुँच चुका है।
तालचेर वासियों की मांग है कि इस भवन को ध्वस्त कर आधुनिक तरीकों से पुनर्निर्मित करना है। इसका मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें, तैल चित्र, संत, विभिन्न पुस्तकें और पर्चे इकट्ठा करना और स्कूल, कॉलेज के छात्रों में देशभक्ति की भावना जगाना था, लेकिन स्थानीय लोगों ने इस तथ्य के बारे में कई तरह की अटकलें भी लगाई हैं। कि इसके पुनरुद्धार के लिए करीब 5 करोड़ रुपये अभी भी पड़े हुए हैं।
तलचेर के मीडिया प्रतिनिधियों,समाजिक संस्थाओ,बुद्जीवियो की मांग है कि इस प्रजामंड़ल भवन का पुनरुद्धार कर इसके उद्देश्य को पूरा किया जाए। पर भविष्य में इसे लेकर स्थानीय प्रशासन द्वारा क्या निर्णय लिया जाता है यह तो आनेवाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल तालचेर वासीयो में उम्मीद की आस देखी जा रही है।





