सावन का पाप
शहर के कोतवाली थाना में रिटायर्ड शिक्षक गांगुली गुरु जी का पुराना घर था।। जिसमें खुद 71 वर्षीय गांगुली जी के साथ उनकी बहु एक 15 साल का पोता रहता था। घर में उनके अलावा एक काम वाली बाई रहती थी जो शाम 6 बजे के आसपास अपने घर चली जाती थी। गुरुजी का बेटा भारतीय सेना में अफसर था। जिसकी इन दिनों अरुणाचल में पोस्टिंग थी। एक रात गुरुजी अपने पोते और बहू के साथ शहर में एक पुराने परिचित के घर किसी समारोह में शामिल होने गए। वापसी रात दो बजे हुईं। उन्होंने पाया कि घर का ताला टूटा है और समान अस्त व्यस्त है। जांच पड़ताल की तो गांगुली जी की आलमारी में रखे कुछ नगद रकम और घड़ी के अलावा बहु की अलमारी से पुराने सोने गहने चोर ले गए थे।। किसी तरह रात गुजारने के बाद दुखी गुरुजी ने पुलिस को सूचना देने की बात कहीं। सुबह बहु ने फोन लगाकर पुलिस को घर में चोरी होने की जानकारी दी। थाने से तिवारी जी छोटे दरोगा घर आए प्रारंभिक जांच की,कुछ सवाल_जवाब किए। फिर गुरु जी को एक दो दिन बाद थाने आने को कहा।। दो दिन बाद जब गुरुजी थाने गए तब छोटे दरोगा तिवारी ने उनसे कहा आपको किसी पर संदेह है तो बताइए। हमारी जांच तो चल रही है। लेकिन सावन में ये जो रोज_रोज की बरसात हो रही है इसके कारण जांच धीमी हो जा रही है। मुझे लगता है इस क्षेत्र में सक्रिय कुछ नामजद चोरो से पूछताछ करने पर ही मसला हल हो जायेगा। वैसे आपके घर चोरी हुए समान की क्या कीमत होगी? गुरुजी ने कहा चोरी के गहने मेरी स्वर्गवासी पत्नी के थे,जिसकी अनुमानित कीमत 5 लाख रु तक होगी। वही नगदी रकम 50/60 हजार होना चाहिए। इन सोने के गहने से हमारी कुछ अच्छी यादें जुड़ी है। आपको पता होगा एक ईमानदार सरकारी कर्मचारी वो भी गुरुजी के लिए सोने के गहने बना पाना जंग जीतने बड़ा कठिन काम होता है। तिवारी दरोगा ने उनसे कहा गुरुजी मान लीजिए पुलिस आपको आपका चोरी हुआ समान दिलवा देती है तो आप सेवा पानी में क्या दीजियेगा?? देखिये मुझे बोलना तो नहीं चाहिए लेकिन आप ही ने कहा गहनों से आपकी यादें जुड़ी है मतलब वो आपके लिए तो बेशकीमती है। गुरुजी ने कहा मैने तो कभी अपने काम और सेवा के बदले किसी से कुछ नहीं लिया। इसलिए ये व्यवहार मुझसे नहीं होगा आप ही बता दीजिए आप क्या चाहते हैं??
तिवारी मुस्कुराया और कुटिलता के साथ बात रखी।। वैसे तो अनमोल चीज़ों की कोई कीमत नहीं होती। लेकिन आप रियाटर्ड और समानित शिक्षक है,आपका बेटा फौजी अफसर है। इस लिहाज से चोरी हुए समान की कीमत का 10 प्रतिशत सेवा शुल्क(रिश्वत) दे दीजिएगा। गुरुजी ने सर हिलाकर सहमति दे दी,और थाने से बाहर निकल आए। इसके दो_तीन दिन बाद छोटे दरोगा ने गांगुली जी के घर फोन किया और बताया आपका चोरी हुआ समान मेरे व्यक्तिगत प्रयास से मिल गया है,एक बार देख लीजिए फिर उसे थाना प्रभारी को सौंप कर विधिवत आपको वापस दिया जाएगा। जिसे बहु ने उठाया और कहा पापा की तबीयत थोड़ी खराब चल रही है आपको कुछ कहना है तो दोपहर में घर जाइए। तिवारी ने भी सोंचा अच्छा है थाने में लेन देन करने पर सबकी नजर लगी रहती है। इसलिए सीधे गुरुजी के घर जाकर सेवा शुल्क ले लिया जाए।। दोपहर 1 बजे जब तिवारी दरोगा गुरुजी के घर पहुंचे तो पाया कि गुरुजी कहने के टेबल में दवाईयों के साथ बैठे है। बहु रसोई से खाना लेकर टेबल में जमा रही है। तिवारी ने कहां मैडम आप भी आ जाइए और देख लीजिए कि आपके समान सब सही है। गुरुजी और बहू ने गहने देखे और पहचान लिया। तिवारी ने कहा आप खुश है तो सेवा शुल्क(रिश्वत) दे दीजिए ताकि आगे की फॉर्मेलिटी निपटा कर आपका सामान आपको दे दिया जाए। गुरुजी ने बहू को इशारा किया और टेबल पर खाने की प्लेट लगाकर तिवारी को खाने का निवेदन किया। तिवारी ने पूछा मैडम आपने भोजन में क्या बनाया है?? बहु ने कहा दरोगा जी बंगाली खाने में मछली तो बनती है,जो बनी भी है। इसके अलावा मटर आलू सब्जी की और दाल भी रसोई में बनी है।
तिवारी ने पूछा सब में प्याज लहसुन डला होगा। बहु ने कहा हां,,*तिवारी बोले हम त्रिवेदी ब्राह्मण हैं,मैडम।। सावन में शुद्ध शाकाहारी भोजन ही खाते है हमारे यहां तो सावन में प्याज लहसुन खाना बड़ा पाप माना जाता है।।* इसलिए भोजन तो रहने दीजिए। कृपया सेवा शुल्क दीजिए और मैं अपने घर जाकर भोजन कर लूंगा।।
बहु और गुरुजी चुपचाप खड़े रहे। बहु ने कहा अच्छा दरोगा जी एक बात बताइए कि आपको सावन में प्याज लहसुन खाने भर से पाप लग जाता है। *तो आप सावन के इस पावन महीने में मास_ मछली खाने वाले हम पापी लोगों के घर का सेवा शुल्क कैसे खा सकते हैं??* इसमें तो आपको और ज्यादा पाप लग जाएगा।। ऐसा करिए आप 7 दिन बाद आइए तब तक सावन भी चला जाएगा और आपको सेवा_शुल्क लेने में पाप भी नहीं लगेगा। मै सेवा शुल्क का पैसा घर के बाहर बगीचे में रख दूंगी आप वहीं से ले लीजिएगा।। तिवारी छोटे दरोगा बुत बनकर पूरे 10 मिनट खड़े रहे,और धीरे से बाहर निकल गए।।*
कृति - नितिन सिन्हा (संपादक,दैनिक खबर सार)





