शिक्षित ही बेरोजगार क्यो है

एक वाक्या जो मैने देखा,जहाँ से मुझे इस पोस्ट को लिखने की प्रेरणा मिली आपके समक्ष रखता हूँ। रोजगार के लिए उपजिलापाल कार्यालय के सामने डिग्रीधारी युवक युवतियाँ धरना प्रदर्शन कर रहे थे। डिग्रीधारी बेरोजगारो की तादात हजारो में थी, धरनाप्रदर्शन दिन भर चला। अन्य पत्रकारो के साथ मैं भी इस घटना को कवरेज कर रहा था वही प्रदर्शन स्थल से थोड़ी दूरी बनाकर चाय,नाश्ता, पानीबोतल,बेचने वालो ने अपनी अस्थायी दुकान लगा रखी थी।शामतक उन्हें कईबार चीजे मंगवानी पडी़ शाम को मै भी उनलोगो से गप्पे मारने लगा बातोबातो में पता चला हर एक ने और दिनो के मुकाबले अच्छी कमाई की है, उनमे से एक ने कहा आज की बचत सैकड़ा नही हजारो में होगी,"ऐसे धरने रोज होते रहे तो मजा आ जाए।" और वे सभी कम पढ़ेलिखे थे इसलिए नौकरी पर ध्यान ही नही गया कमाई के लिए जो संसाधन मिला उसी में पारांगत हो गए।

शिक्षित ही बेरोजगार क्यो है

हमारे देश में बेरोजगारी को मुद्दा बनाकर धरना प्रदर्शन करना, सड़क जाम करना, सरकार को कोसना, हड़ताले करना आम बात है। 
क्या आपने कभी ऐसे प्रदर्शनो में अनपढ़ या चौथी पाँचवी तक पढ़े युवक युवतियो को देखा है, नही ना। आखिर क्यो? क्या इन्हें नौकरी नही चाहिए, या ये कमाना नही चाहते या फिर इन्हे गाड़ी, बंगला ऐसो आराम पसंद नही है। इन्हे भी सरकार से रोजगार माँगने का पूरा हक है।
पर डिग्री धारी युवा पीढ़ी ही हमेशा विरोध क्यो करते है? 
शायद इसलिए की इन्हे साहब ही बनना है और दूसरा काम नही करेंगे। इन विरोधियों में सबसे अधिक संख्या बीएड़ और डीएलएड़ जैसे शिक्षक पात्राताओ की है। आखिर क्यो? 
शायद इसलिए की डिग्रीधारी युवा  सरकारी नौकरी पर अपना अधिकार समझते है और दूसरी नजर में सरकारी नौकरी को ही रोजगार और बेसरकारी नौकरी को बेरोजगार का दर्जा दिया जाता है। 
देखा जाए तो रोजगार कर पैसे कमाने की दौड़ में अशिक्षित युवा शिक्षितो से आगे है। 
निर्माण श्रमिक,फेरीवाले,रेडी़वाले,फलबिक्रेता,ड्राइवर,दर्जी,मैकेनिक, रंगाई पुताई,नाशाता स्टाल, फास्टफुड़ स्टाल इत्यादि जैसे काम करने वाले लोग कम पढ़ेलिखे या अनपढ़ मिलेगे जिनकी आमदनी किसी समान्य सरकारी नौकरी करने वालो से कम नही, पर उच्चशिक्षित युवा इन सब कामो को करने में शर्म महसूस करता है।
दरअसल देखा जाय तो हमारे देश  में रोजगार की कमी नही काम करने वालो की कमी है, खेती, पशुपालन, निर्माण कार्य, सफाई कर्मी, वाहन चालक, सेल्समैन, डिलिवरी मैन, आदि ऐसे कई क्षेत्र है जहाँ हमेशा काम करनेवालो की कमी रहती है पर ऐसे जगहो में डिग्री धारी बेरोजगार काम नही करना चाहते।
आज मानव संसाधन की कमी के कारण खेती पिछडती जा रही है और अनाज मंहगे होते जा रहे है।
कितनी अजीब बात है कि एक इंटर पास युवा पशुपालन नही करना चाहता पर डेयरीफार्म,बोयलर फार्म में मुनीम  की नौकरी करने के लिए लालायित रहता है ।
यही वजह है कि एक अनपढ़ या कम पढ़ालिखा इंसान नेताओ के आगेपिछे घूमकर अपनी पहचान बनाता हुआ एक दिन नेता बन जाता है जिनका नीजी सहायक एक स्नातक होता है और नेतागिरी का रूवाब ऐसा की देश की शान माने जाने वाली प्रशासनिक अधिकारीयो को भी इनके इसारे पर चलना होता है।