शिक्षकों को चार महीने से नहीं मिला वेतन बना चर्चा का विषम
राजगांगपुर: सुंदरगढ़ जिला में स्थित राजगांगपुर प्रखंड़ के सरकारी स्कूलों के शिक्षक पिछले तीन महीने से वेतन का इंतजार कर रहे हैं। जबकि जिले के अन्य प्रखंडो़ में शिक्षकों को समय पर वेतन मिल चुका है, राजगांगपुर प्रखंड़ में शिक्षकों को लगातार चौथे महीने वेतन नहीं मिला है। इस देरी को लेकर शिक्षक और स्थानीय लोग ब्लॉक शिक्षा अधिकारी पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, सरकारी नियमों के तहत हर महीने की 30 तारीख तक शिक्षकों को वेतन जारी किया जाना चाहिए। हालांकि, राजगांगपुर प्रखंड़ में किस कारण से वेतन जारी नहीं किया जा रहा है, यह स्पष्ट नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि वे लगातार ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सरिता सोरोनिया को इस मुद्दे को लेकर शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
शिक्षा विभाग पर उठ रहे सवाल:
दो दिन पहले, राजगांगपुर ब्लॉक के एक स्कूल में शिक्षकों की अनुपस्थिति को लेकर नाराज अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। सहायक प्रखंड़ शिक्षा अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद बातचीत के जरिए मामले को सुलझाया गया और जल्द समाधान का आश्वासन दिया गया। लेकिन शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने का मुद्दा अब भी अनसुलझा है।
शिक्षकों का आक्रोश:
शिक्षकों का कहना है कि यदि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अपने दायित्वों को गंभीरता से लें, तो यह समस्या काफी पहले ही सुलझ सकती थी। उनका आरोप है कि सरिता सोरोनिया पिछले चार सालों से ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के पद पर हैं, जबकि सरकारी नियमों के अनुसार, तीन साल में अधिकारी का तबादला होना चाहिए।
जनता की प्रतिक्रिया:
वेतन में देरी से न केवल शिक्षक परेशान हैं, बल्कि यह मुद्दा अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। कई लोगों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्न उठा रहे हैं।
उच्चस्तरीय जांच की मांग:
शहरवासी और शिक्षक अब इस मामले की जांच और जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। यह देखना बाकी है कि शिक्षकों को उनका वेतन कब तक मिलता है और देरी की वजह क्या थी। लेकिन यह स्पष्ट है कि इस मुद्दे ने राजगांगपुर ब्लॉक की प्रशासनिक व्यवस्था पर एक प्रश्न वाचक चिन्ह लगा दिया हैं।





