विश्व के प्रथम पत्रकार देवर्षि नारद की जयंती मनाई गई

विश्व के प्रथम पत्रकार देवर्षि नारद की जयंती मनाई गई

"बस्ती नारद चर्चा कार्यालय में परंपरागत हर्षोल्लास से मनी नारद जयंती, देवर्षि को बताया विश्व का प्रथम पत्रकार"

बस्ती में शुक्रवार को नारद चर्चा कार्यालय पर परंपरागत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ देवर्षि नारद जयंती का आयोजन किया गया और कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने एकमत होकर कहा कि देवर्षि नारद को विश्व का प्रथम पत्रकार मानना कोई अतिशयोक्ति नहीं बल्कि वैदिक परंपरा और उनके लोक-कल्याणकारी कार्यों से स्वतः सिद्ध होता है और उनका संपूर्ण जीवन संवाद सत्य और धर्म की स्थापना के लिए समर्पित था। 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार विनोद कुमार उपाध्याय ने कहा कि तीनों लोकों में स्वतंत्र रूप से विचरण कर देवताओं दानवों मानवों और ऋषियों के बीच संवाद स्थापित करने वाले नारद जी ही वस्तुतः प्रथम संवाददाता थे और आज पत्रकारिता का जो मूल धर्म है सत्य की खोज तथ्य का प्रसारण और लोक कल्याण वह नारद जी ने हजारों वर्ष पहले निभाया था इसलिए हम सभी पत्रकार उनके वंशज हैं और हमारी जिम्मेदारी है कि उनके आदर्शों पर चलकर समाज में सकारात्मक और तथ्यपरक संदेश पहुंचाएं जिससे समाज को सही दिशा मिल सके

साहित्यकार राम कृष्ण लाल जगमग ने कहा कि नारद जी केवल सूचना वाहक नहीं थे बल्कि वे लोक कल्याण के लिए संवाद करते थे और उनका प्रत्येक संवाद धर्म नीति और शांति की स्थापना के लिए होता था वहीं अनुराग कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि नारद मुनि ने नारद भक्ति सूत्र के माध्यम से भक्ति के नौ रूपों को सरल भाषा में आमजन तक पहुंचाया और यही परंपरा आज की पत्रकारिता में सरल भाषा में खबर देने के रूप में दिखाई देती है। 

वशिष्ठ कुमार पाण्डेय ने नारद जी को लोक संपर्क और जनसंपर्क का जनक बताया और कहा कि उन्होंने हमेशा समाज को जोड़ने का कार्य किया सर्वेश श्रीवास्तव ने कहा कि नारद जी ने कभी विभाजन के लिए संवाद नहीं किया बल्कि शांति और सद्भाव के लिए किया और लवकुश सिंह ने कहा कि आज के पत्रकारों को नारद से प्रेरणा लेकर समाज को जोड़ने का काम करना चाहिए न कि तोड़ने का। इस अवसर पर हरीश दरवेश श्रवण कुमार मिश्रा राकेश तिवारी महेश चंद्र मौर्य राजेंद्र उपाध्याय आलोक कुमार श्रीवास्तव राम कुमार रवि और गोकरन पाण्डेय सहित दर्जनों पत्रकार साहित्यकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे और सभी ने नारद जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवर्षि नारद तीनों लोकों में विचरण करते थे और हर जगह की सूचना देवताओं राजाओं और ऋषियों तक पहुंचाते थे वे किसी एक पक्ष के नहीं बल्कि धर्म और सत्य के पक्षधर थे और नारद पुराण महाभारत तथा रामायण में उनके संवादों का उल्लेख है जहाँ उन्होंने विवाद सुलझाने और धर्म की स्थापना में अहम भूमिका निभाई इसी कारण पत्रकारिता जगत उन्हें आदि पत्रकार या देवर्षि पत्रकार कहकर सम्मान देता है और कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कहा कि नारद जयंती केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि पत्रकारिता के नैतिक दायित्वों को याद करने का दिन है जिसका मूल मंत्र है सत्य बोलना समाज को जोड़ना और लोकहित को सर्वोपरि रखना ।