विभाग की अनदेखी से बिगड़ रही स्थिति खून पी रही है सड़क   

विभाग की अनदेखी से बिगड़ रही स्थिति खून पी रही है सड़क   

अनुराग आचार्य (व्यौरोचीफ) 

तालचेर, देश की अर्थव्यवस्था के विकास में यातायात की अहम भूमिका है, इसलिए गमनागमन का विकास होना अत्यंत आवश्यक है । 

इस बिषय पर केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक सभी जल्दबाजी में हैं। सरकार गमनागमन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक कोष से करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।  निर्माण विभिन्न योजनाओं और विभागों के माध्यम से मील-दर-मील सड़क का निर्माण किया जा रहा है।  सड़कों के निर्माण और वाहनों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।  खनिज परिवहन से लेकर सार्वजनिक परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी के बाद उसी अनुपात में दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं।  

दोषपूर्ण और खतरनाक सड़कें, शराब पी कर , लापरवाही से गाड़ी चलाना दुर्घटनाओं में वृद्धि का मुख्य कारण है। ऐसे में देखा जा रहा है कि प्रशासन इस क्षेत्र में उतनी तत्परता नहीं दिखा रही है।  जिसका ज्वलंत उदाहरण राष्ट्रीय राजमार्गों को लिया जा सकता है!  कहा जा रहा है कि इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर गड्ढे होने के कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं।  एक ओर जहां टिप्पर और ट्रक विभिन्न उद्योगों तक अयस्क पहुंचा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रतिदिन हजारों वाहन कारखानों सहित विभिन्न क्षेत्रों में आवाजाही कर रहे हैं।  सड़कों पर कही बन रहे हैं बड़े गड्ढे और छोटे-छोटे गड्ढे बनते नजर आ रहा ।और इसी वजह से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं,जिससे जान-माल का नुकसान हो रहा है। इसी तरह, कहीं सड़क किनारे लगाई गई पोल की दीवारों पर सुरक्षा बाड़ें गायब हैं तो कहीं टूटी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर, पोल के दीवार पर विभिन्न अरोपित पेड़ उग आए हैं, जो पोल को कमजोर कर रहे हैं।  खबरें हैं कि इसके कारण हुए हादसों में कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है।

इसी तरह, राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैदल चलने वालों या साइकिल चालकों को असुरक्षित सड़कों के कारण दुर्घटनाओं में मरते देखा गया है। लोग इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर गाड़ी चलाना सुरक्षित महसूस करने लगे हैं। यह सड़क आम लोगों के खून से लाल हो रही है। तो फिर इस सड़क पर दुर्घटना का कारण बनी जर्जर सड़कों की मरम्मत या खंभों पर सुरक्षा बाड़ आदि बनाने पर विभागीय चुप्पी क्यों है?  यह विभागीय अधिकारियों की अनदेखी है या अक्षमता यह आज भी एक प्रश्न बना हुआ है, अब देखना यह है, कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर कब उच्च अधिकारियों की नजर पड़ती है!