पुल के नीचे है बिद्युत उपमंडल व कार्यालय और ऊपर अंधेरा
अनुराग आचार्य (व्योरोचीफ)
तालचेर में चांईपाल ओवर ब्रिज पर बत्ती लगाने की मांग
तालचेर - बंअरपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित चांईपाल पर लगभग 1 किमी तक फैले रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण के लिए बार-बार आंदोलन करने के बाद उक्त पुल का निर्माण कई वर्षों के इंतजार के बाद पूरा हुआ।
और अब पुल से होकर सफर कर रहे राहगीरों से सुना जा सकता है कि पुल के दोनों ओर रोशनी लाने के लिए फिर से एक और आंदोलन की जरूरत है, क्योंकि प्रशासन या राजनेता इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस पुल से हजारों भारी वाहनों के आवागमन के कारण पुल जर्जर हो चुका है और पुल पर कोयले के साथ मिली धूल गिरने के कारण पुल दिन-रात धूल से भरा रहता है। पुनः बांईपाल से तालचेर की ओर कुछ दूर जाने पर उक्त पुल तालचेर के अंत में स्थित है। लिहाजा अगर इस पुल की हालत ऐसी है तो तलचर की क्या हालत होगी, इससे साफ है। जब तालचेर बहुत अधिक राजस्व दे रहा है तो तालचेर के चांईपाल पुल पर रोशनी क्यों नहीं हो रही है जबकि इस राजस्व से बाहरी क्षेत्रों के पुलों पर रोशनी की जा रही है? तालचेर के लोगों के प्रति ऐसा भेदभाव क्यो ? स्थानीय प्रशासन, राजनेता हर जगह इसकी उपेक्षा कर रहे हैं और यहाँ प्रश्न उठता हैं? इस पुल के दोनों किनारों पर थोड़ी सी प्रकाश व्यवस्था के लिए क्या आंदोलन की जरूरत है! इस पुल के नीचे चांईपाल उप मंड़ल बिजली सबस्टेशन व कार्यालय है, लेकिन पुल के दोनों पाशर्व में उजाला ना होना दीपक तले अँधेरा जैसी है।





