तुफान अर्नव नजर मचाया हाहाकार:किसान की टूटी कमर
तूफान 'अर्नव' ने मचाया हाहाकार: किसानों की कमर टूटी, खेत बने समुंदर, अन्नदाता पर टूटा आफत का पहाड़!
लखनऊ- बंगाल की खाड़ी की कोख से जन्मा खतरनाक चक्रवाती तूफान 'अर्नव' ने दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक कोहराम मचा दिया है। आंध्र प्रदेश के तटों को तबाह करने के बाद, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ में भारी तबाही के निशान छोड़ता हुआ यह बवंडर अब उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए काल बनकर आया है।
पिछले 48 घंटों से हो रही बेमौसम मूसलाधार बारिश और तूफानी हवाओं ने पूरे पूर्वांचल को जलमग्न कर दिया है।
1. खड़ी फसल 100% बर्बाद - खेतों में सड़ रहा सोना
जिन खेतों में कुछ दिन पहले सोने जैसी धान की फसल लहलहा रही थी, आज वहां सिर्फ तबाही का मंजर है। तेज आंधी ने धान को जमीन पर पटक दिया और लगातार बारिश ने उसे सड़ा दिया। किसान अपनी फसल को छाती से लगाकर रो रहा है। हजारों एकड़ धान की फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो चुकी है। मजदूर भी खेत में काटने को तैयार नहीं।
2. रबी की बुआई पर लटकी तलवार - गेहूं, सरसों, मक्का का संकट
सबसे बड़ा संकट अब आने वाली फसलों पर है। अक्टूबर का आखिरी सप्ताह गेहूं, सरसों, जौ, बाजरा, मक्का, मटर, चना की बुआई का सबसे सुनहरा समय होता है। लेकिन खेतों में 2 से 3 फीट तक पानी भरा है। कहीं-कहीं खेत तालाब बन गए हैं। ट्रैक्टर खेत में उतरते ही धंस जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर 10 दिन के अंदर पानी नहीं निकला तो रबी की बुआई 1 महीना लेट हो जाएगी, जिससे पैदावार आधी रह जाएगी।
3. गन्ना किसानों की तो टूट गई आस - पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही ब्रेक
गन्ना बेल्ट में सबसे ज्यादा मायूसी है। अक्टूबर-नवंबर में ही गन्ना पेराई सत्र चालू होता है। मिलें गन्ना खरीदने को तैयार बैठी हैं, लेकिन किसान गन्ना काटकर मिल तक ला ही नहीं पा रहा। ज्यादा बारिश से गन्ने की लंबाई और मोटाई दोनों पर असर पड़ा है। गन्ने में चीनी की मात्रा घट गई है। गन्ने के खेत गिर गए हैं, आवक ठप है। किसान कह रहे हैं - "पर्ची तो मिलेगी, पर गन्ना खेत में ही सड़ जाएगा।"
4. सब्जी और दलहन भी चौपट
सिर्फ अनाज ही नहीं, आलू, टमाटर, मिर्च, गोभी, बैंगन जैसी सब्जियों की नर्सरी भी पानी में बह गई है। उड़द, मूंग की फसल भी खराब हो गई है।
अन्नदाता की आंखों में आंसू, सरकार से लगाई गुहार
लखनऊ बाराबंकी कानपुर सुल्तानपुर अयोध्या अमेठी सहित पूरे उत्तर भारत के किसानों का रो-रोकर बुरा हाल है। किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि तत्काल राजस्व टीम भेजकर फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए।
भारतीय जन सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनेश ठाकुर कर्पूरी और वरिष्ठ नेता ठाकुर धर्मेन्द्र सिंह जी ने सरकार से मांग की है कि किसानों को प्रति एकड़ 30 हजार रुपये का मुआवजा, खाद-बीज पर सब्सिडी और गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए, नहीं तो जनसेवा दल किसानों के साथ सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगा।*किसान बोला - "साहब, कर्ज माफ नहीं तो कम से कम फसल का दाम तो दे दो, नहीं तो परिवार भूखा मर जाएगा!।





