जमीन के लिए कोरबा में मृतक घोटाला जिंदा पूरनलाल को 9 साल पहले ही मार डाला
कोरबा में 'मृतक घोटाला' - जिंदा पूरनलाल को 9 साल पहले ही मार डाला। 5 एकड़ पट्टा हड़पा, R.I. आशीष सोनी और पटवारी मोहनलाल कैवर्त पर फर्जीवाड़े के आरोप।
कोरबा/पसान। पसान तहसील में जमीन घोटाले का सबसे बड़ा खेल सामने आया है। जिंदा आदमी को कागजों में 9 साल पहले ही मार दिया गया और उसकी 5 एकड़ पट्टे की जमीन हड़प ली गई। पूरन के वारिस पक्ष का आरोप है कि इस पूरे खेल में तहसील के R.I. आशीष सोनी और हल्का पटवारी मोहनलाल कैवर्त ने खुलकर साथ दिया।
सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा: 2015 में मरा, 2006 में डेथ सर्टिफिकेट,
1. पूरनलाल नाई को 1983-84 में 5 एकड़ जमीन का पट्टा मिला। खसरा नंबर 719/5 व 726/14।
2. पूरनलाल की असल मौत: 14 फरवरी 2015
3. फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बना: 2006-07 में- यानी जिंदा आदमी को 9 साल पहले ही मार दिया।
4. सुन्दरियांबाई धोबी ने खुद को पत्नी बताकर पूरी जमीन अपने नाम करा ली। पूरनलाल नाई और सुन्दरियांबाई धोबी में कोई रिश्ता नहीं।
पट्टे की जमीन की बंदरबांट: कलेक्टर की अनुमति तक नहीं ली
1. सुन्दरियांबाई ने 2010-11 में 2 एकड़ जमीन शुभा-गीता चतुर्वेदी को बेच दी।
2. मौत के बाद भतीजे संतु धोबी ने बाकी 3 एकड़ जमीन 15/06/2017 को राकेश अग्रवाल को बेच दी।
3. पट्टे की जमीन बिना कलेक्टर अनुमति के बेचना गैरकानूनी है, फिर भी रजिस्ट्री हो गई।
तहसील का आदेश दो बार निरस्त, फिर भी नहीं रुके
1. तहसील ने 30/08/2018 को राकेश अग्रवाल के नाम नामांतरण कर दिया।
2. SDM पोड़ी उपरोड़ा ने 11/02/2022 को तहसील का आदेश रद्द कर दिया।
3. अपर आयुक्त बिलासपुर ने 30/10/2023 को SDM का आदेश सही ठहराया।
कोर्ट में केस चलते-चलते फिर बेच दी जमीन: R.I.-पटवारी पर गंभीर आरोप
सबसे बड़ा आरोप: R.I. आशीष सोनी और पटवारी मोहनलाल कैवर्त पर।* पूरन लाल नाई के वारिसानों का कहना है कि जिला व्यवहार न्यायालय कटघोरा में केस लंबित होने के बावजूद दोनों अधिकारियों ने खसरा नंबर 726/14क, 726/14ख का चौहद्दी नक्शा काटकर दिया ताकि जमीन फिर बेची जा सके।





