गाँव तोड़ता प्रधानी चुनाव 

गाँव तोड़ता प्रधानी चुनाव 

हरहर शम्भू चौधरी (मुख्य संपादक) 

एक समय था जब ग्रामीणों की सर्व सम्मति से गाँव का मुखिया चुना जाता था। जो गाँव के छोटे बड़े विवाद गाँव के चौपाल में सुलझा दिया करता था। तब गाँव का मुखिया एक मजिस्ट्रेट की भूमिका निभाता था। कई बार आरोपी को सजा भी सुनाता था और मुखिया के फैसले सभी मानते थे। उनका फैसला अंतिम माना जाता था।

परंतु अब गाँव के इस प्रणाली में काफी बदलाव आ गया है। अब पाँच वर्षो के लिए मुखिया चुने जाने लगे है। यह मुखिया चुनाव के माध्यम से चुने जाते है। उसपर भी बिडंबना यह है कि मुखिया को भी आरक्षण मिलने लगा है। सरकार द्वारा चुनाव लड़ने के लिए   आरक्षित श्रेणियों के लोगों को ही टिकट दी जा रही है। उसपर भी टिकट लेने से लेकर चुनाव जितने तक छल, कपट, पैसे और बाहुबल का भरपूर प्रयोग किया जा रहा है। चुनिंदा लोगों को ही टिकट मिलने से ग्रामीणों की मजबूरी है कि उन्हीं लोगों में से किसी एक को वोट दे, अर्थात अब गाँव का मुखिया लोगों को थोपा जा रहा है। 
इस व्यवस्था ने कई बार गाँव को अयोग्य और चरित्रहीन मुखिया भी दिया है। वोट देना ग्रामीणों की मजबूरी भी है क्योंकि वोट ना दिया तो वोटर तालिका से नाम कटने का डर और नाम कटी तो निवास प्रमाण पत्र, रासन कार्ड एवं अन्य सरकारी योजनाओं के मिलने में दिक्कत आएगी या योजनाओं के लाभ से बंचीत होना पड़ेगा। ऐसा हुआ तो बच्चों की पढ़ाई में भी कई दिक्कते आएगी। 
उसपर भी दस उम्मीदवार में से आप एक को ही वोट दे पाएंगे तो एक को वोट देने का अर्थ नौ से वैर मोल लेना। दिक्कत तब और बढ़ जाती है जब एक ही पद पर कई रिश्तेदार या पारिवारिक मित्र खड़े हो जाते है। किसे वोट दे और किसका प्रचार करे, किसके साथ उठना बैठना करे,इसी कसमाकस में, कई लोग गाँव में किसी के साथ घुमना-फिरना, किसी के घर जाना तक छोड़ देते है यह सोच कर कि वह तो फलां का समर्थक है कही मुझे फलां उम्मीदवार अपना बिपक्षी ना मान ले। 
ओर इसी तरह हमारे पुर्वजो द्वारा  रिश्ते नाते के धागे में पिरो कर रखी गई गाँव की एकता का एक एक मोती बिखरता गया। और गाँव टूटता गया। 
अब हर एक गाँव राजनीति का अखाड़ा बन गया है। शांति व्यवस्था तो ऐसे भंग हो चुकी है कि एक नाली का भी मुद्दा हो तो  न्यायालय तक पहुंचने लगा है। गाँव का मुखिया का एक ही लक्ष्य रह गया कि चुनाव में खर्च हुए पैसे कैसे अदा हो और अगले चुनाव की रणनीति क्या हो,कैसे जीता जाए ?