खेल विकास के लिये ओडिशा और बिहार ने हाथ मिलाया

खेल विकास के लिये ओडिशा और बिहार ने हाथ मिलाया

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

देश में खेल संस्कृति को सशक्त बनाने की दिशा में ओडिशा और बिहार ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए खेल विकास, खिलाड़ी आदान-प्रदान तथा जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान और प्रोत्शाहन के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। ओडिशा के खेल एवं युवा सेवा मंत्री सूर्यवंशी सूरज और बिहार की खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह के बीच रविवार (2 अगस्त) को कलिंगा स्टेडियम में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी। बैठक में दोनों राज्यों के बीच खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, उच्चस्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान, प्रतिभा विकास तथा खिलाड़ियों के हर तरह से विकास के लिये दीर्घकालिक सहयोग की रूपरेखा पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने ओडिशा की विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं, हाई परफॉर्मेंस सेंटरों और सुव्यवस्थित खेल तंत्र की सराहना करते हुए कहा कि बिहार भी तेजी से अपने खेल ढांचे का विस्तार कर रहा है। उन्होंने दोनों राज्यों के बीच नियमित मैत्री प्रतियोगिताओं और खिलाड़ी आदान-प्रदान कार्यक्रमों के आयोजन का प्रस्ताव रखा, जिससे खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल मिल सके। उन्होंने बताया कि बिहार की प्रत्येक ग्राम पंचायत में वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, फुटबॉल तथा क्रिकेट अभ्यास पिच विकसित की जा रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति को नई ऊर्जा मिलेगी।

ओडिशा के खेल एवं युवा सेवा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री ट्रॉफी जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार की 'खेलो इंडिया' योजना के विस्तार का स्वागत करते हुए जम्मू-कश्मीर में आयोजित चिंतन शिविर की तर्ज पर राज्य और जिला स्तर पर भी ऐसे मंथन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से पूर्व नियमित राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों के कौशल और आत्मविश्वास को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ओडिशा के खेल एवं युवा सेवा विभाग के आयुक्त-सह-सचिव भूपेंद्र सिंह पुनिया ने राज्य के खेल विकास मॉडल की विस्तृत जानकारी देते हुए स्कूलों, खेल संस्थानों और सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एक सुदृढ़ और टिकाऊ खेल वातावरण के निर्माण के लिए सभी संबंधित संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और प्रदर्शन में खेल विज्ञान के समुचित उपयोग को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार के साथ उनके करियर की दीर्घकालिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। बैठक में खेल विज्ञान की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। श्रेयसी सिंह ने खिलाड़ियों को चोटों से बचाव, संतुलित पोषण, रिकवरी और वैज्ञानिक फिटनेस प्रबंधन के प्रति जागरूक बनाने पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए इन पहलुओं को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

बैठक के अंत में श्रेयसी सिंह ने ओडिशा के खेल विकास मॉडल की  प्रशंसा करते हुए इसे पूरे देश के लिए प्रेरणादायी बताया और कहा कि अन्य राज्यों को भी इससे सीख लेकर अपने खेल तंत्र को मजबूत करना चाहिए।