एनआईटी राउरकेला ने की इंडिस्कॉन 2025 की मेजबानी

एनआईटी राउरकेला ने की इंडिस्कॉन 2025 की मेजबानी

प्रेस विज्ञप्ति:राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान 'राउरकेला'

एनआईटी राउरकेला ने 6वें आईईईई इंडिया काउंसिल इंटरनेशनल सबसेक्शंस कॉन्फ्रेंस – इंडिस्कॉन 2025 की मेजबानी एवं शुभारंभ किया।

राउरकेला, 21 अगस्त 2025: एनआईटी राउरकेला में आज 6वें आईईईई (इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स) इंडिया काउंसिल इंटरनेशनल सबसेक्शंस कॉन्फ्रेंस (इंडिस्कॉन 2025) का शुभारंभ हुआ। यह आईईईई इंडिया काउंसिल का एक प्रमुख वार्षिक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम है, जो 21 से 23 अगस्त 2025 तक आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन आईईईई राउरकेला सबसेक्शन और आईईईई इंडिया काउंसिल के संयुक्त तत्वावधान में “समाज के लिए स्मार्ट और सतत प्रौद्योगिकियां” विषय पर आधारित है।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. पूनम सिंह (जनरल चेयर, इंडिस्कॉन 2025) के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने बताया कि इंडिस्कॉन आईईईई इंडिया काउंसिल का वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसे हर वर्ष भारत के किसी अलग आईईईई सबसेक्शन द्वारा आयोजित किया जाता है। इस वर्ष राउरकेला सबसेक्शन द्वारा एनआईटी राउरकेला में इसका आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य विश्वभर के प्रमुख शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों को एक मंच पर लाना है।

उद्घाटन सत्र में कई विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि के रूप में विश्वरंजन पलई (कार्यकारी निदेशक, राउरकेला स्टील प्लांट, सेल) उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. आशुतोष दत्ता (प्रोफेसर, जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, अमेरिका एवं एनआईटी राउरकेला के विशिष्ट पूर्व छात्र) शामिल हुए। अतिथि-विशेष के रूप में प्रो. के. उमामहेश्वर राव (निदेशक, एनआईटी राउरकेला) और प्रो. प्रेरणा गौड़ (चेयर, आईईईई इंडिया काउंसिल) उपस्थित रहे। प्रो. सुस्मिता दास (एनआईटी राउरकेला) और प्रो. सुदीप मिश्रा (आईआईटी खड़गपुर) सम्मेलन के जनरल चेयर के रूप में मंचासीन रहे।

मुख्य अतिथि बिस्वरणजन पलई ने अपने उद्घाटन संबोधन में प्रतिभागियों से सम्मेलन के सत्रों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने इंडिस्कॉन 2025 को एक जीवंत मंच बताते हुए कहा कि यह वह स्थान है जहां प्रतिष्ठित शोधकर्ता अपने क्रांतिकारी कार्य प्रस्तुत करते हैं और विशेषज्ञ अपने बहुमूल्य विचार साझा करते हैं। उन्होंने इसे विचारों के आदान-प्रदान और विज्ञान व प्रौद्योगिकी के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप भविष्य की दिशा तय करने के लिए एक उत्कृष्ट अवसर बताया।

डॉ. आशुतोष दत्ता ने प्रौद्योगिकी के विकास और उसे लागू करने के साथ-साथ मजबूत पेशेवर नेटवर्क बनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि प्रयास से 80% परिणाम भी प्राप्त हो, तो निरंतरता अंततः सफलता दिलाती है। अपने छात्र जीवन को याद करते हुए उन्होंने एनआईटी राउरकेला को अपने करियर की नींव बताया और अपने संस्थान लौटकर विज्ञान के नए युग पर चर्चा करने वाले मंच का हिस्सा बनने पर खुशी व्यक्त की।

इंडिस्कॉन 2025 में 21 देशों के प्रतिभागियों से 3,570 शोध-पत्र प्राप्त हुए हैं। यह हाइब्रिड मोड में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 225 प्रतिभागी कैंपस में और करीब 200 प्रतिभागी ऑनलाइन जुड़ रहे हैं। तीन दिनों के दौरान 425 शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे, साथ ही चार मुख्य भाषण, 18 आमंत्रित व्याख्यान और एक पैनल चर्चा (जिसमें ‘वीमेन इन इंजीनियरिंग’ सत्र शामिल है) भी होंगे।

सत्र के दौरान प्रो. के. उमामहेश्वर राव ने तकनीकी प्रगति को सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप करने की आवश्यकता पर बल दिया और प्रतिभागियों को सतत विकास में योगदान देने वाली अंतःविषय सहयोग संभावनाओं को खोजने के लिए प्रेरित किया। प्रो. प्रेर्णा गौड़ ने आईईईई की वैश्विक, क्षेत्रीय और स्थानीय संरचना का परिचय देते हुए अत्याधुनिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने और उद्योग–शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत करने की इसकी दृष्टि साझा की।

एनआईटी राउरकेला के अन्य विशिष्ट पूर्व छात्र प्रो. बिद्याधर सुबुद्धि (निदेशक, एनआईटी वारंगल) और प्रो. सरत कुमार पात्र (निदेशक, एनआईटी अगरतला)  भी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उद्घाटन समारोह का समापन प्रो. सुस्मिता दास (जनरल चेयर, इंडिस्कॉन 2025) द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें अतिथियों, आयोजन समिति और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।

यह सम्मेलन विचार-विनिमय, शोध प्रस्तुति और समाज पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालने वाले नवाचारपूर्ण तकनीकी समाधानों की खोज के लिए एक सक्रिय मंच प्रदान करता है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, सतत प्रौद्योगिकियां, वीएलएसआई डिजाइन, डिजिटल हेल्थकेयर आदि विषयों पर विशेष तकनीकी सत्र शामिल हैं। स्वीकृत एवं प्रस्तुत सभी शोध-पत्र आईईईई एक्सप्लोर (IEEE Xplore) में वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रस्तुतियों, चर्चाओं, कार्यशालाओं, उद्योग मंच और विशेष सत्रों की समृद्ध श्रृंखला के साथ यह सम्मेलन नवाचार, नेटवर्किंग और सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।