आबकारी कार्रवाई पर उठते सवाल

आबकारी कार्रवाई पर उठते सवाल

छापेमारी गांवों में, अवैध शराब शहर में क्यों? राउरकेला आबकारी कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल : आबकारी अधीक्षक पर कथित रिश्वत मामले के बाद विभाग की निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में; शहर में अवैध शराब बिक्री की शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल

राउरकेला में आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ विजिलेंस कार्रवाई ने केवल एक कथित रिश्वत प्रकरण को सुर्खियों में नहीं ला दिया है, बल्कि आबकारी विभाग की पूरी कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आबकारी अधीक्षक धनेश्वर बराड के कथित तौर पर एक सरकारी अंग्रेजी शराब दुकान के सेल्समैन से 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़े जाने के मामले में अंतिम सच जाँच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा। लेकिन इस घटना ने विभाग के कामकाज को लेकर जनता के बीच उठ रहे सवालों को जरूर गंभीर बना दिया है।
सबसे अहम सवाल है—आबकारी विभाग की सक्रियता आखिर दिखाई कहाँ देती है?
ग्रामीण इलाकों में महुआ शराब और शराब बनाने की सामग्री के खिलाफ आबकारी विभाग की छापेमारी लगातार होती रहती है। अवैध शराब के खिलाफ ऐसी कार्रवाई जरूरी भी है। लेकिन दूसरी ओर शहर के प्रमुख और व्यस्त इलाकों में कथित अवैध शराब बिक्री की शिकायतें लंबे समय से चर्चा में हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कार्रवाई का पैमाना क्या सभी क्षेत्रों और सभी कारोबारियों के लिए समान है? राउरकेला के मेन रोड, ट्रैफिक गेट, प्लांटसाइट, डेली मार्केट, उदित नगर, ओरामपाड़ा, मालगोदाम, शीतल नगर, टिंबर कॉलोनी, नए बस अड्डे और आसपास के क्षेत्रों में ढाबों, रेस्तरां तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कथित अवैध शराब बिक्री को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।
यदि इन शिकायतों में वास्तविकता है, तो फिर विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर शहर के बीचों-बीच कथित रूप से चल रही ऐसी गतिविधियाँ लंबे समय तक विभाग की नजर से कैसे बच सकती हैं?
गांवों में सख्ती, शहर में चुप्पी क्यों?
कानून की नजर में अवैध शराब का कारोबार कहीं भी हो, कार्रवाई का आधार समान होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र में किसी छोटे कारोबारी के खिलाफ तुरंत छापेमारी और गिरफ्तारी होती है, तो शहर के व्यावसायिक क्षेत्रों में सामने आने वाली शिकायतों पर भी उसी तत्परता से कार्रवाई होनी चाहिए। मुद्दा यह नहीं है कि गांवों में कार्रवाई क्यों होती है। मुद्दा यह है कि शहर में शिकायत होने के बावजूद कार्रवाई होती हुई क्यों नजर नहीं आती? किसी भी सरकारी विभाग की विश्वसनीयता केवल उसकी कार्रवाई की संख्या से नहीं, बल्कि कार्रवाई की निष्पक्षता से तय होती है।
‘सेटिंग’ की चर्चाओं की जांच जरूरी स्थानीय स्तर पर कुछ स्थानों पर अवैध शराब बिक्री को लेकर कथित मिलीभगत और ‘सेटिंग’ की चर्चाएं भी सुनने को मिलती रही हैं। आबकारी अधिकारियों की संभावित भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए जाते रहे हैं। इन आरोपों को बिना निष्पक्ष जाँच के प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इन शिकायतों को पूरी तरह नजरअंदाज करना भी उचित नहीं होगा। विजिलेंस विभाग की कार्रवाई के बाद यह जाँच महत्वपूर्ण हो जाती है कि कथित रिश्वत प्रकरण का वास्तविक संदर्भ क्या था। क्या यह केवल व्यक्तिगत स्तर का मामला था या इसके पीछे कोई व्यापक व्यवस्था, दबाव अथवा नेटवर्क काम कर रहा था? जाँच में यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
आबकारी विभाग की जवाबदेही तय हो
शराब का कारोबार सरकार के लिए महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत है। इसलिए लाइसेंसी दुकानों की निगरानी, अवैध बिक्री पर नियंत्रण और सरकारी राजस्व की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ हैं।
राउरकेला में विभाग को चाहिए कि वह शहर के संवेदनशील इलाकों में नियमित और निष्पक्ष जाँच अभियान चलाए। ढाबों, रेस्तरां, फास्ट-फूड प्रतिष्ठानों और अन्य स्थानों पर अवैध शराब बिक्री की शिकायतों की स्वतंत्र जाँच हो। साथ ही लाइसेंसी शराब दुकानों से जुड़े संभावित अनियमितताओं की भी जाँच की जानी चाहिए। जहाँ विभागीय अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं, वहां जाँच पूरी होने तक पारदर्शिता बनाए रखना और आरोप सिद्ध होने की स्थिति में कठोर कार्रवाई करना जरूरी है। सवाल एक अधिकारी से आगे का है। धनेश्वर बराड के खिलाफ विजिलेंस कार्रवाई का अंतिम निष्कर्ष जाँच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। इसलिए किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना अभी उचित नहीं होगा। लेकिन इस घटना ने आबकारी विभाग को अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा करने का अवसर जरूर दे दिया है। अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई केवल छापेमारी और जब्ती के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कार्रवाई का वास्तविक उद्देश्य अवैध कारोबार की पूरी श्रृंखला तक पहुंचना और कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित करना होना चाहिए।
जनता के सवाल बिल्कुल स्पष्ट हैं—
अगर जिम्मेदारों को गाँवों में अवैध शराब दिखाई देती है, तो शहर के बीचों-बीच कथित अवैध बिक्री क्यों नहीं दिखाई देती? और अगर दिखाई देती है, तो कार्रवाई क्यों नहीं होती? इन सवालों का जवाब सिर्फ बयानों से नहीं मिलेगा। जवाब मिलेगा निष्पक्ष जांच, पारदर्शी कार्रवाई और जवाबदेही से। क्योंकि सवाल सिर्फ एक अधिकारी का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता का है जिसे अवैध शराब के कारोबार पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी दी गई है।