आखिर क्यो हो रहा है फ्लाईओवर का विरोध

कुकड़ा गेट रेलवे फाटक में फ्लाईओवर निर्माण का विरोध क्यों हो रहा है।जब हमने यह जानने की कोशिश की तो दो सबसे बडे़ कारण जो सामने आए वह आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं।

पहला कारण तो यह है कि कपाटमुंडा़ पंचायत अंतर्गत आने वाले बरटोली गांव। इस गाँव की भौगोलिक स्थिति त्रिकोणीय है जो तीनो ओर से रेलवे पटरियों से घिरा है।
इस गांव से बाहर निकलने के लिए किसी सटीक रास्ते का इंतजाम अभी तक नहीं किया गया है जो मुख्य रास्ता है वह कुकड़ा फाटक गेट के बीचो-बीच दो रेल पटरीयो के बीच से निकलता है अगर यहां फ्लाईओवर बन जाता है तो ग्रामीणो के बाहर निकलने का रास्ता बिल्कुल बंद हो जाएगा।आन्य दो रास्तो से पैदल तो चला जा सकता है पर वह जोखिम भरा होगा।
किसी भी वाहन का गांव के अंदर जाना संभव नहीं हो पाएगा जिससे गांव में कई समस्याएं उत्पन्न होगी एंबुलेंस ना जा पाने से मरीजों को समस्या होगी वही बस, ट्रक या अन्य चापहिया वाहन ना जाने से सामान लाने लेजाने शादियों में बरात आने जाने में असुविधा होगी। 

और भविष्य में रेलपटरियो के विस्तार किए जाने से पैदल चलना भी मुश्किल होगा। इसलिए ग्रामीणो की मांग है कि उनके लिए पहले रास्ते का स्थायी उपाय किया जाए। 

दुसरा कारण है डेरा ओराम! 

डेमा ओराम का कहना है वो एक विस्थापित है और केन्द्र सरकार द्वारा उन्हे दी गई लाभ राज्य सरकार द्वारा नही दिया जा रहा है,जिसके वे हकदार है।

उन्होने क्या कहा यह आपको भी सुनना चाहिए।

डेमें ओराम के पास जो दस्तावेज है उसके अनुसार राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के  अध्यक्ष डॉक्टर नंद कुमार साय की अध्यक्षता में दिनांक 19/11/2019 को आयोग में आयोजित बैठक में निम्नलिखित बातो पर बिचार किया गया था। जो (संक्षेप में)  इस प्रकार है, 

1. आयोग की पिछली अनुशंसा दिनांक 3:04 2018 के अनुसार विस्थापित परिवारों को 5 एकड़ असिंचित और 2 एकड़ सिंचित जमीन प्रशासन द्वारा तत्काल आवंटित की जाए यह कार्य 2 माह में पूर्ण कर लिया जाए।

2. प्रशासन एवं रेलवे विभाग की उक्त जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से पहले विस्थापित अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों के साथ बैठक करनी चाहिए यदि अत्यावश्यक ना हो तो वहां पुलिस बल तैनात नहीं करना चाहिए।

3.रेलवे को कनिष्ठ पदों पर नौकरी में स्थानीय अनुसूचित जनजाति के विस्थापित लोगों की उम्मीदवारी पर सहानुभूति पूर्वक विचार करना चाहिए और उन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष डॉक्टर नंद कुमार साय की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में डेमे ओराम की आवेदन पर बिचार विमर्श करने के लिए राष्ट्रीय जनजाति आयोग के सदस्य डॉ. एस. के डामोर, संयुक्त सचिव डॉ.के ताऊथांग, निदेशक डाँ.ललित लट्टा, सहायक निदेशक आर.के दुबे ,परामर्शक आलोक कुमार द्विवेदी,
ओडिशा शासन के अधिकारी 
अभय कुमार नायक (अतिरिक्त सचिव रा. व आपदा प्रबंधन) रेलवे बोर्ड नई दिल्ली के सुरेंद्र पाल माही ( ईडीई-आर ई एस)  एस बाला चंद्र अय्यर (ईओई"एन")
 दक्षिण पूर्व रेलवे के अधिकारी डॉक्टर महुआ वर्मा सीपीओ (एड एम),  एस. विश्वास (एसपीओ)  सुंदरगढ़ जिले के कलेक्टर निखिल पवन कल्याण आदि उपस्थित थे।