अयोध्या से सुल्तानपुर तक गुंजा ब्राह्मण समाज का संकल्प
धर्मेन्द्र कुमार सिंह (रिपोर्टर)
भगवान परशुराम की विचारधारा और समाजहित की मांगों को लेकर अखिल भारतीय भगवान परशुराम समिति ने रविवार को एक ऐतिहासिक पदयात्रा का आयोजन किया। यह पदयात्रा भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या के राम की पैड़ी (नये घाट) से प्रारंभ हुई और धार्मिक उत्साह, नारों तथा संकल्प गीतों के बीच सुलतानपुर तक पहुंची।
हजारों की संख्या में शामिल ब्राह्मण समाज के लोग हाथों में झंडे-बैनर लिए चल रहे थे। पदयात्रा में युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सभी कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहे थे। पूरे मार्ग पर जय परशुराम, गौ माता की जय, धर्म की रक्षा करो जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा।
इस विशाल यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज और संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराना था। समिति ने यात्रा के दौरान अपनी चार प्रमुख मांगों को सार्वजनिक रूप से दोहराया और कहा कि यह केवल ब्राह्मण समाज की ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र की अस्मिता से जुड़ी मांगें हैं।
चार प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
1. सुलतानपुर का नाम बदलकर पुनः "कुश भवनपुर" किया जाए। समिति का तर्क है कि यह नगर भगवान राम के पुत्र कुश द्वारा बसाया गया था, अतः इसका प्राचीन और गौरवशाली नाम पुनर्जीवित होना चाहिए।
2. गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा प्रदान किया जाए। समाज का कहना है कि भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान माता के समान है, अतः उसे संवैधानिक रूप से राष्ट्रमाता का दर्जा मिलना चाहिए।
3. देवी-देवताओं के स्वरूपों का अभद्र प्रदर्शन या नृत्य पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। समिति ने कहा कि चाहे यह किसी कथावाचक की शैली में हो या किसी झांकी के माध्यम से, ऐसे कृत्य धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं।
4. गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगे और अयोध्या जिले में भगवान परशुराम की एक भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए। समिति का मानना है कि यह प्रतिमा न केवल आस्था का केंद्र बनेगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी होगी।
नेतृत्व और प्रमुख हस्तियां
इस पदयात्रा में संगठन मंत्री सौरभ शुक्ला ने नेतृत्व की भूमिका निभाई। उनके साथ ऋषभदेव माता कामाख्या देवी के पुजारी इंद्रेश कौशिक, समाजसेवी सुशील तिवारी और सुशील चतुर्वेदी जैसी प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहीं। यात्रा में सम्मिलित लोगों ने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता।
प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया
सुलतानपुर पहुंचने पर पदयात्रा का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर समिति के प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से समाज ने अपनी मांगों को राज्य और केंद्र सरकार तक पहुंचाने की अपील की। पदयात्रा में शामिल लोगों ने संकल्प लिया कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन शांत नहीं बैठेगा।
सांस्कृतिक जागरण का स्वरूप
इस पदयात्रा ने न केवल धार्मिक और सामाजिक चेतना जगाई बल्कि इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का स्वरूप भी मिला। जगह-जगह पदयात्रियों का स्वागत हुआ, लोगों ने फूल-मालाओं से अभिनंदन किया और कई स्थानों पर समाजसेवियों ने प्रसाद एवं जलपान की व्यवस्था की।
समिति का कहना है कि यह यात्रा आने वाले समय में ब्राह्मण समाज की एकजुटता का प्रतीक बनेगी और उनकी मांगें सरकार को मजबूती से सोचने पर विवश करेंगी।





