45 लाख के लोन घोटाले और अय्याशी का सच

45 लाख के लोन घोटाले और अय्याशी का सच

रायगढ़: जिले के घरघोड़ा थाना क्षेत्र से उपजा एक पारिवारिक और वित्तीय विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मीडिया के सामने खुद को प्रताड़ित बताने वाले पिंगल कुमार बघेल के दावों को खारिज करते हुए उनकी पत्नी और पीड़िता सीमा बघेल ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कई गंभीर खुलासे किए हैं। सीमा बघेल ने अदालत के फैसलों, पुलिस डायरी और बैंकिंग साक्ष्यों के आधार पर पिंगल बघेल पर वित्तीय जालसाजी, झूठे शपथ-पत्र देने और महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।

₹45 लाख के लोन घोटाले और पहचान चोरी का आरोप

पीड़िता के अनुसार, पिंगल बघेल ने उनके पैन कार्ड और आधार कार्ड का दुरुपयोग कर जाली हस्ताक्षरों के सहारे बैंक से ₹45,00,000/- का लोन ले लिया था। जब इस मामले की पुलिस में शिकायत दर्ज हुई, तो पुलिस शिकायत के महज 8 दिनों के भीतर पिंगल ने बैंक का पूरा लोन चुकता कर दिया। सवाल उठाया गया है कि खुद को ₹22 हजार महीने कमाने वाला मजदूर बताने वाले व्यक्ति के पास अचानक 8 दिनों के भीतर इतनी बड़ी रकम कहां से आई। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर क्रमांक 138/2026 दर्ज कर सक्षम न्यायालय में अंतिम चालान (चार्जशीट) पेश कर दिया है, जिससे पिंगल बघेल आधिकारिक रूप से मुल्जिम बन चुका है।

झूठे शपथ-पत्र और विलासिता का खुलासा

अदालत को गुमराह करने के लिए पिंगल बघेल ने शपथ-पत्र में खुद को ₹22,000/- महीने कमाने वाला वेल्डिंग मजदूर बताया था। हालांकि, बैंकिंग दस्तावेजों से यह साबित हुआ कि उसके खातों में ₹9,50,000/- की कैश क्रेडिट (CC) लिमिट है और वह अकेले एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को प्रति माह ₹50,000/- कार लोन की किस्त चुका रहा है। अदालत में झूठे तथ्य छिपाने के इस अपराध (Perjury) के तहत उसके खिलाफ धारा 340 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके अलावा, अपर सत्र न्यायाधीश (ADJ Court) ने 23 सितंबर 2026 के अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि पिंगल अपने बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं कर रहा है। अदालत ने ₹30,000/- प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण और ₹2,10,000/- बकाया एरियर चुकाने का आदेश दिया है। आदेश की अवहेलना पर उसके व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ('प्रकाश फैब्रिकेशन' और 'बघेल सेंट्रिंग') तथा वाहनों की कुर्की की कार्रवाई की जा रही है। जेएमएफसी अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत ₹10,000/- प्रतिमाह अतिरिक्त देने का भी आदेश दिया है।

चरित्रहीनता और पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल

पीड़िता ने आरोप लगाया कि पिंगल बघेल के संबंध अन्य महिलाओं के साथ रहे हैं और उसने अपने कार्यालय की स्टाफ आरती निर्मलकर के साथ भी प्रताड़ना व उत्पीड़न किया। विरोध करने पर उसने सीमा बघेल के साथ मारपीट की। इसके अलावा, घरघोड़ा थाने के कुछ पुलिसकर्मियों पर रिश्वत लेकर पिंगल के ₹45 लाख के लोन फ्रॉड को दबाने और सीमा बघेल के खिलाफ महज 7 दिनों के भीतर झूठा चोरी का मामला दर्ज कर उन्हें व उनके भाई को जेल भेजने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस संबंध में सीमा बघेल ने डीजीपी रायपुर और गृह सचिव छत्तीसगढ़ शासन के समक्ष BNSS की धारा 218 के तहत संलिप्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ विधिक अभियोजन स्वीकृति हेतु आवेदन प्रेषित किया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता के तथ्य

मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता तथागत श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई में अक्सर एक ही पक्ष सामने आ पाता है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया और वकीलों के प्रयासों से सच्चाई समाज के सामने आती है। उन्होंने बताया कि अदालत के माध्यम से पीड़िता को झूठे मामलों में बड़ी राहत मिली है और अंतरिम भरण-पोषण का आदेश पारित हुआ है। साथ ही, एक अन्य पीड़िता जानकी सिदार के प्रकरण में भी पूर्वाग्रहित पुलिसकर्मी के आचरण के विरुद्ध वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।